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बरशैणी का वो 500 रुपए वाला गेस्ट हाउस और पिंक फ्लॉयड का जूलिया ड्रीम

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"भाई कितना चार्ज होगा रूम का?" मैंने गेस्ट हाउस वाले लड़के से पूछा। मेरे और तोमर के लिए किसी भी गेस्ट हाउस में घुसने से पहले यही सबसे पहला और सबसे ज़रूरी सवाल होता है। शायद हमारे जैसे अधिकतर घुमक्कड़ भी सबसे पहले यही पूछते होंगे, जब वो किसी होटल या गेस्ट हाउस जाते होंगे। "आप पहले रूम देख लीजिए। फिर आपको चार्ज भी बता दूंगा।" वो लड़का बोला। मुझे लगा कि अब ये हमें उल्लू बनाने की कोशिश करेगा। कुछ के कुछ दाम बताएगा। वैसे भी वीकेंड है। हिमाचल में टूरिस्टों की तगड़ी भीड़ होती है। और इस दफा तो लॉन्ग वीकेंड पड़ गया है।  मैंने तोमर की तरफ देखा। उसने अपनी आंखों से वही कहा जो इस तरह की स्थिति में वो ज़ुबान से भी कहता, "लैट्स सी।" Guest House in Barshaini Himachal Pradesh and Julia Dream of Pink Flyod - Photo: Social Media सेब के बागीचों से घिरे उस गेस्ट हाउस में वो हमें किसी मेज़ जैसे रास्ते से लेकर जाने लगा। और फिर एक बड़ी पतली सी बालकनी वाला लकड़ी से बनी एक दुमंज़िला इमारत की दूसरी मंज़िल पर ले गया। वहां जाते हुए हम लकड़ी के तख्तों से बने दो छोटे-छोटे जीनों से होकर ...

Maadhavi | साउथ से बॉलीवुड तक खूब नाम कमाया। लेकिन एक फिल्म ने सब बर्बाद कर दिया। पढ़िए Actress माधवी की Biography

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रजनीकांत इन्हें अपने लिए भाग्यशाली मानते थे। दूसरी श्रीदेवी कहा जाने लगा था इन्हें। लेकिन एक दिन अचानक इन्होंने फ़िल्मों में काम करना छोड़ दिया। और मीडिया ने भी इनके बारे में लिखना बंद कर दिया। नाम है इनका माधवी। 1980 के दशक में आई कई फिल्मों में आपने इन्हें देखा होगा। उस वक्त के कई बड़े हीरोज़ की ये हीरोइन बनी थी।  राजेश खन्ना की सुपरहिट फिल्म स्वर्ग में माधवी ही उनकी पत्नी के किरदार में दिखी थी। हिंदी के अलावा साउथ की फिल्मों में भी माधवी ने खूब काम किया। साउथ की फिल्मों से ही माधवी का करियर भी शुरू हुआ था। और रजनीकांत संग इनकी जोड़ी बड़ी हिट हुई। चलिए आज माधवी जी की कहानी भी जानते हैं।  Biography of veteran actress Maadhavi - Photo: Social Media   1 4 सितंबर 1962 को हैदराबाद में माधवी का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम गोविंदस्वामी और माता का नाम शशिरेखा है। माधवी का रियल नेम कनक विजयलक्ष्मी है। माधवी की एक बहन और एक भाई भी हैं। छोटी उम्र से ही माधवी ने भरतनाट्यम और लोकनृत्य सीखना शुरू कर दिया था।  माधवी की स्कूलिंग हैदराबाद के स्टेनली गर्ल्स हाई स्कूल से हुई थी। स्...

Vishwajeet Pradhan | Meerut का नाम Mumbai में रोशन करने वाले Actor विश्वजीत प्रधान की कहानी | Biography

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फौजी वो सीरियल था जिसने भारत को शाहरुख खान दिया। लेकिन फौजी सीरियल से एक और शानदार कलाकार का डेब्यू हुआ था। उस कलाकार का नाम था विश्वजीत प्रधान।  विश्वजीत प्रधान भले ही सिनेमाई आसमान में शाहरुख खान जैसा चमकता हुआ सितारा ना बन सके हों। लेकिन उन्होंने भी अपनी एक पहचान कायम की है। भले ही लोग विश्वजीत प्रधान के बारे में बहुत ज़्यादा जानते ना हों। मगर इनका चेहरा लोग बहुत अच्छी तरह से पहचानते हैं।  Biography of Bollywood Actor Vishwajeet Pradhan - Photo: Social Media Meerut Manthan आज आपको Vishwajeet Pradhan की कहानी से रूबरू कराएगा। इस लेख में डिटेल में Vishwajeet Pradhan की कहानी हम जानेंगे। विश्वजीत प्रधान की कहानी पसंद आए तो अपने उन दोस्तों संग ये कहानी शेयर कीजिएगा जो फ़िल्मों और फ़िल्म कलाकारों की कहानियां पसंद करते हैं।  विश्वजीत प्रधान उन दिनों इलाहबाद यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई कर रहे थे। वहां रहते हुए ये थिएटर भी करते थे। एक दिन विश्वजीत प्रधान को पता चला कि एक नया सीरियल बन रहा है जिसके ऑडिशन दिल्ली में चल रहे हैं। दोस्तों ने इन्हें ऑडिशन देने की सलाह दी तो ये दिल्...

G.M. Durrani | 22 रुपए लेकर बंबई भागकर आए जी.एम. दुर्रानी की ज़िंदगी की पूरी कहानी | Biography

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"जला है जिस्म अगर, दिल भी जल गया होगा। कुरेदते हो जब राख, जुस्तजू क्या है?" जी.एम.दुर्रानी अपने करियर के शिखर पर थे जब फिल्मी दुनिया से इनका मोहभंग हो गया था। एक बहुत पुराने रेडियो इंटरव्यू में जी.एम.दुर्रानी साहब ने कहा था कि ईश्वर के करीब जाने के लिए साल 1951 में उन्होंने गाना-बजाना छोड़ दिया था।  फिल्मी दुनिया छोड़ने के बाद जी.एम.दुर्रानी ने अपनी दाढ़ी बढ़ा ली। इसलिए ताकि लोग फिल्मी दुनिया के लोग उन्हें जल्दी से पहचान ना सकें। अगर कोई फिल्मी दुनिया का इंसान इन्हें दिख भी जाता था तो ये अपनी गर्दन नीची कर लेते थे। Biography of G.M. Durrani - Photo: Social Media जी.एम. दुर्रानी साहब का कहना था कि जो ज़िंदगी वो फिल्म लाइन में जी रहे थे उससे उन्हें विरक्ति हो गई थी। फिल्मी दुनिया में रहते हुए जी.एम.दुर्रानी ने अच्छा पैसा कमाया था।  मगर फिल्म लाइन छोड़ने के बाद वो दान-पुण्य में इतने ज़्यादा मशग़ूल हो गए कि पता ही नहीं चला कब बैंक-बैलेंस खत्म हो गया और वो फक्कड़ हो गए। ज़िंदगी चलाने के लिए उन्होंने एक परीचित से कुछ रुपए उधार लिए और किराने की एक दुकान शुरू कर दी। और फिर यूं ही उनक...

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