G.M. Durrani | 22 रुपए लेकर बंबई भागकर आए जी.एम. दुर्रानी की ज़िंदगी की पूरी कहानी | Biography
"जला है जिस्म अगर, दिल भी जल गया होगा। कुरेदते हो जब राख, जुस्तजू क्या है?" जी.एम.दुर्रानी अपने करियर के शिखर पर थे जब फिल्मी दुनिया से इनका मोहभंग हो गया था। एक बहुत पुराने रेडियो इंटरव्यू में जी.एम.दुर्रानी साहब ने कहा था कि ईश्वर के करीब जाने के लिए साल 1951 में उन्होंने गाना-बजाना छोड़ दिया था। फिल्मी दुनिया छोड़ने के बाद जी.एम.दुर्रानी ने अपनी दाढ़ी बढ़ा ली। इसलिए ताकि लोग फिल्मी दुनिया के लोग उन्हें जल्दी से पहचान ना सकें। अगर कोई फिल्मी दुनिया का इंसान इन्हें दिख भी जाता था तो ये अपनी गर्दन नीची कर लेते थे। Biography of G.M. Durrani - Photo: Social Media जी.एम. दुर्रानी साहब का कहना था कि जो ज़िंदगी वो फिल्म लाइन में जी रहे थे उससे उन्हें विरक्ति हो गई थी। फिल्मी दुनिया में रहते हुए जी.एम.दुर्रानी ने अच्छा पैसा कमाया था। मगर फिल्म लाइन छोड़ने के बाद वो दान-पुण्य में इतने ज़्यादा मशग़ूल हो गए कि पता ही नहीं चला कब बैंक-बैलेंस खत्म हो गया और वो फक्कड़ हो गए। ज़िंदगी चलाने के लिए उन्होंने एक परीचित से कुछ रुपए उधार लिए और किराने की एक दुकान शुरू कर दी। और फिर यूं ही उनक...