Actress Rita Bhaduri Biography | वो अभिनेत्री जिसे आज हर किसी ने भुला दिया लेकिन जिसे चाहते सब थे
बहुत लंबे समय तक लोगों को लगता रहा कि रीता भादुड़ी जया भादुड़ी उर्फ़ जया बच्चन की बहन हैं। ये कन्फ़्यूज़न इसलिए फ़ैला था क्योंकि जया बच्चन की सगी बहन का नाम भी रीता ही है। यानि वो भी कभी रीता भादुड़ी ही हुआ करती थी। हालांकि अब वो रीता वर्मा हैं।
रीता भादुड़ी जी की बात करें तो हमने और आपने तमाम फ़िल्मों में इन्हें देखा है। शुरुआत इनकी बतौर हीरोइन हुई थी। बाद में ये निगेटिव किरदारों में भी दिखी। फ़िल्मों के अलावा तमाम टीवी शोज़ में भी इन्होंने काम किया था।
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| Rita Bhaduri - Photo: Social Media |
आज रीता भादुड़ी जी की कहानी जानते हैं। अभी तक गलतफ़हमी थी मुझे कि इनका जनमदिन 4 नवंबर को होता है। क्योंकि विकीपीडिया सहित कई दूसरी जगहों पर यही रीता जी की जन्मतिथि बताई जाती है। मगर ब्लॉग बीते हुए दिन के संचालक शिशिर कृष्ण शर्मा के एक लेख के माध्यम से पता चला कि वास्तव में इनकी जन्मतिथि वास्तव में 11 जनवरी 1950 है।
रीता भादुड़ी व इनका परिवार इंदौर में रहता था। एक बार ये लोग मुंबई घूमने आए। और मुंबई इस परिवार को इतनी पसंद आई कि इन्होंने यहीं बसने का फ़ैसला किया। साल 1957 में रीता भादुड़ी जी के पिता अपने परिवार को लेकर मुंबई आ गए।
रीता जी उस वक्त सात साल की हो चुकी थी। रीता जी की मां का नाम था चन्द्रिमा भादुड़ी। मुंबई आने के बाद चन्द्रिमा जी को एक नवनीत नामक एक मैगज़ीन में सब-एडिटर की नौकरी मिल गई।
मुंबई में रहने वाले बंगाली परिवारों से जब इस परिवार का मेल-जोल बढ़ा तो दुर्गा पूजा में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रीता भादुड़ी जी की मां चंद्रिमा भादुड़ी हिस्सा लेने लगी।
ऐसे ही एक कार्यक्रम में चंद्रिमा भादुड़ी को एक्टिंग करते देखा उस वक्त के बहुत नामी फ़िल्मकार बिमल रॉय व नितिन बोस ने। उन दोनों ने चंद्रिमा जी को अपनी फ़िल्मों में अभिनय करने का मौका दिया। वो फ़िल्में थी बंदिनी व नर्तकी। और साल 1963 में ये दोनों फ़िल्में रिलीज़ हुई थी।
बंदिनी फ़िल्म में चंद्रिमा भादुड़ी जी ने जेल वॉर्डन का किरदार निभाया था। ये किरदार नोटिस किया गया। और चंद्रिमा जी को और फ़िल्में मिलने लगी। चंद्रिमा भादुड़ी जी ने तीसरा कौन, नन्ही कलियां, आनंद आश्रम, लाल पत्थर, शराफ़त व सावन भादो सहित, लगभग तीस फ़िल्मों में काम किया। यहां रीता जी के पिता रमेशचंद्र भादुड़ी जी की भी बात कर लेते हैं।
रमेशचंद्र भादुड़ी अंग्रेजी हुकुमत में जागीरों के कमिश्नर हुआ करते थे। नौकरी के दौरान उनका काफ़ी समय मध्य भारत के अलग-अलग शहरों में गुज़रा था। बाद में वो इंदौर में शिफ़्ट हो गए थे। इंदौर में ही रीता भादुड़ी जी का जन्म हुआ था। चलिए अब वापस कहानी पर वहीं पहुंचते हैं जहां ये चल रही थी।
मां को फ़िल्मों में एक्टिंग करते देख रीता भादुड़ी जी को भी बचपन से ही फ़िल्में आकर्षित करने लगी थी। तो रीता भादुड़ी जी भी नाटकों में अभिनय करने लगी। कॉलेज में होने वाले ड्रामों में ये बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थी। और चूंकि इन्हें एक्टिंग में ही करियर बनाना था। तो साल 1971 में ये पहुंच गई FTII पुणे।
यहां इनके बैचमेट रहे कई लोग आगे चलकर फ़िल्मों में नाम कमाने में सफ़ल रहे। जैसे शैलेंद्र सिंह, कंवलजीत व शबाना आज़मी। FTII में इनका कोर्स दो सालों तक चला। फिर पासआउट होते ही रीता जी को आईना नाम की एक फिल्म मिली।
के. बालाचंदर द्वारा निर्देशित उस फ़िल्म में राजेश खन्ना-मुमताज़ हीरो-हीरोइन थे। संगीत दिया था नौशाद ने। 1974 में उस फ़िल्म का निर्माण हुआ था।
इसी दौरान रीता भादुड़ी की मुलाक़ात हुई साउथ के नामी डायरेक्टर सेतुमाधवन से। रीता और सेतुमाधवन की ये मुलाकात मोहन शर्मा से ज़रिए हुई थी, जो FTII में इनके बैचमेट थे। सेतुमाधवन एक फ़िल्म के लिए हीरोइन तलाश रहे थे। मलयालम भाषा की उस फ़िल्म का नाम था कन्याकुमारी।
सेतुमाधवन जब रीता से मिले तो बहुत प्रभावित हुए उन्होंने रीता को कन्याकुमारी में हीरोइन ले लिया। हीरो थे कमल हासन। इन्हीं सेतुमाधवन ने कुछ समय बाद मलयालम भाषा की अपनी बड़ी हिट फ़िल्म चट्टाकारी को हिंदी में जूली नाम से बनाया। और जूली में भी उन्होंने रीता भादुड़ी को एक अहम किरदार दिया।
जूली फ़िल्म का एक गाना 'ये रातें नई पुरानी, कहती हैं कोई कहानी' रीता भादुड़ी जी पर ही पिक्चराइज़ किया गया था। जूली भी बहुत बड़ी हिट फ़िल्म थी। मगर ये फ़िल्म ही रीता भादुड़ी जी के करियर के लिए निगेटिव साबित हुई। इस फ़िल्म में रीता जी ने बहन की भूमिका निभाई थी। बस फिर क्या था।
फ़िल्म इंडस्ट्री ने रीता जी को टाइपकास्ट ही कर दिया। उन्हें चरित्र रोल ही दिए गए जूली के बाद। लेकिन दूसरी तरफ़ गुजराती फ़िल्मों में रीता भादुड़ी बड़ी हीरोइन बन गई। गुजराती फ़िल्मों में रीता जी का करियर शुरू हुआ था FTII के ही इनके एक और बैचमेट के ज़रिए, जिनका नाम था परेश मेहता।
परेश मेहता ने रीता जी को दिगंज ओझा और निरंजन मेहता से से मिलाया था, जो उस दौर में गुजराती फ़िल्म इंडस्ट्री का बहुत बड़ा नाम थे। उन्होंने रीता भादुड़ी को अपनी एक फ़िल्म में एज़ ए हीरोइन साइन किया। उस फ़िल्म का नाम था 'लाखों फूलाणी'। ये फ़िल्म साल 1976 में आई थी। और बहुत सफ़ल रही थी।
इस फ़िल्म की कामयाबी ने रीता जी को गुजराती फ़िल्म इंडस्ट्री में बहुत कामयाबी दिलाई। और देखते ही देखते वो गुजराती फ़िल्म इंडस्ट्री की टॉप हीरोइन बन गई। अगले आठ सालों तक रीता जी गुजराती फिल्म इंडस्ट्री में व्यस्त रही। इस दौरान अपना ठिकाना भी उन्होंने वडोदरा को बना लिया।
गुजराती फिल्मों में रीता भादुड़ी जी को खूब सफ़लता मिली। मगर उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब साल 1984 में डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राकेश चौधरी एक दिन वडोदरा आए और रीता जी से मिले। ये वो ज़माना था जब भारत में टीवी शोज़ का दौर अपने शैशवकाल में ही था।
राकेश चौधरी एक टीवी शो में काम करने का प्रस्ताव लेकर ही रीता जी के पास आए थे। उस शो का नाम था 'बनते बिगड़ते।' जो भूमिका राकेश चौधरी ने रीता जी को ऑफ़र की थी वो काफ़ी मजबूत थी। तो रीता जी ने भी उस भूमिका को स्वीकार कर लिया। और यूं रीता भादुड़ी की टीवी इंनिंग्स की शुरुआत हुई।
अपने टीवी करियर में रीता जी ने अनेकों चर्चित टीवी शोज़ में काम किया। और रीता जी को देश के अधिकतर घरों के लोग पहचानने लगे। खासतौर पर महिलाएं। बीच-बीच में रीता जी फ़िल्मों में भी काम करती रही। जिस वक्त रीता जी का देहांत हुआ था,(17 जुलाई 2018) तब भी रीता जी का एक शो टीवी पर चल रहा था। उस शो का नाम था निमकी मुखिया। रीता जी उस शो में दादी के किरदार में थी।
रीता जी के निजी जीवन की बात करें तो उन्होंने कभी शादी नहीं की थी। लेकिन कुछ लोग राजीव वर्मा को उनका पति बताते हैं। जो वास्तव में जया बच्चन की बहन रीता के पति हैं। रीता जी की एक बहन भी थी जिनका नाम रूमा भादुड़ी था। और वो भी इनकी ही तरह एक्ट्रेस थी। रूमा जी ने कुछ टीवी शोज़ व फ़िल्मों में काम किया था। 2013 में उनका भी देहांत हो चुका है।
रीता जी की सबसे बड़ी बहन का नाम राका भादुड़ी था। रीता जी के एक भाई भी हैं जिनका नाम है रणदेव भादुड़ी। वो एक कैमरामैन हैं और वडोदरा में रहते हैं। वो उम्र में रीता जी से बड़े थे। रीता भादुड़ी सभी भाई-बहनों में सबसे छोटी थी।

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