10 Unknown Facts about Shabana Azmi | शबाना आ़ज़मी की दस अनसुनी कहानियां

10 Unknown Facts about Shabana Azmi. 18 सितंबर 1950 को पैदा हुई शबाना आज़मी आज भले ही फिल्मों में बहुत ज़्यादा एक्टिव ना हों। 

लेकिन अपने फिल्मी करियर में उन्होंने कुछ ऐसी फिल्मों में काम किया है जो हिंदी सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई हैं। 

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10 Unknown Facts about Shabana Azmi  - Photo: Social Media

पैरलल सिनेमा हो या फिर कमर्शियल सिनेमा, शबाना आज़मी ने हर तरह के सिनेमा में अपनी जानदार अदाकारी के जलवे दिखाए हैं। 

शबाना की प्रोफेशनल लाइफ और पर्सनल लाइफ के बारे में उनके फैंस हमेशा ज़्यादा से ज़्यादा जानने के लिए उत्सुक रहते हैं।

Meerut Manthan शबाना आज़मी की बायोग्राफी पहले ही कह चुका है। लेकिन आज हम आपको शबाना आज़मी की ज़िंदगी से जुड़ी कुछ रोचक और अनसुनी बातें बताएंगे। 

और यकीन कीजिएगा दोस्तों, अगर आप शबाना आज़मी के फैन हैं तो आपको उनकी ये कहानियां ज़रूर पसंद आएंगी। 10 Unknown Facts about Shabana Azmi.

5 बार किया है ये कारनामा

शबाना आज़मी भारत की इकलौती ऐसी अदाकारा हैं जिन्होंने 5 दफा बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड जीता है। साल 1974 में रिलीज़ हुई अंकुर शबाना आज़मी की पहली फिल्म थी। 

और इसी फिल्म के लिए उन्हें पहली दफा बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला था। फिर अर्थ, खंडहर, पार और गॉडमदर के लिए भी शबाना आज़मी को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला था। 

वहीं बात अगर फिल्मफेयर अवॉर्ड्स की करें तो अंकुर, स्वामी, थोड़ी सी बेवफाई, अर्थ, मासूम, अवतार, मंडी, भावना और स्पर्श के लिए शबाना को फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस के खिताब से नवाज़ा गया। 

मकड़ी फिल्म में शबाना ने निगेटिव किरदार निभाया था और इसके लिए इन्हें बेस्ट विलेन का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया। 

जबकी तहज़ीब फिल्म के लिए शबाना को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। फिर नीरजा फिल्म के लिए भी फिल्मफेयर ने शबाना आज़मी को बेस्ट सपोर्टिंग का अवॉर्ड दिया था। 

फिल्मफेयर शबाना आज़मी को 2006 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाज़ चुका है। 1988 में भारत सरकार ने शबाना को पद्मश्री और 2012 में पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया था।

कैसे जया बच्चन शबाना को फिल्मों में ले आई

शबाना आज़मी का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जो कला और साहित्य की दुनिया के गहराई से जुड़ा था। इनकी मां शौकत कैफ़ी एक जानी-मानी थिएटर अदाकारा थी। 

शौकत कैफ़ी ने कुछ फिल्मों में भी काम किया था। वहीं शबाना के पिता कैफ़ी आज़मी एक जाने-माने उर्दू शायर थे। कैफ़ी आज़मी अपने लिखे गीतों से कई फिल्मों के संगीत में चार चांद लगा चुके थे। 

लेकिन फिर भी शबाना आज़मी ने ये कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वो प्रोफेशनल एक्टर बन जाएंगी। मगर जब एक दफा शबाना ने जया बच्चन की फिल्म सुमन देखी तो उनके भीतर भी एक्टिंग करने का जुनून पैदा हो गया। 

सुमन फिल्म में शबाना आज़मी को जया बच्चन की एक्टिंग इतनी ज़्यादा पसंद आई कि उन्होंने फैसला कर लिया कि अब वो भी फिल्म एंड टेलिविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया में दाखिला ज़रूर लेंगी। 

आखिरकार शबाना को एफटीआईआई में दाखिला मिल गया और थैंक्स टू जया बच्चन, जिनकी वजह से शबाना आज़मी एक्टर बनने के लिए मोटिवेट हुई।

शशि कपूर से वो मासूम मुहब्बत

शबाना आज़मी को छोटी उम्र से ही शशि कपूर बहुत पसंद थे। कहना चाहिए कि शबाना को शशि कपूर पर क्रश था। दरअसल, शबाना के पिता क़ैफी आज़मी किसी ज़माने में शशि कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर के पड़ोसी हुआ करते थे। 

शशि कपूर जिस ज़माने में सुपरस्टार हुआ करते थे उस वक्त शबाना आज़मी काफी छोटी थी। वो जब भी शशि कपूर को देखती तो उनके ऑटोग्राफ ज़रूर लेती थी। शबाना अक्सर अपनी तस्वीरों पर शशि कपूर के ऑटोग्राफ लिया करती थी। 

फिर शबाना जब एक्ट्रेस बनी तो वो बड़ी बेसब्री से उस पल का इंतज़ार करने लगी जब किसी फिल्म में उन्हें शशि कपूर के अपोज़िट साइन किया जाता। 

शबाना आज़मी का इंतज़ार खत्म हुआ फिल्म फकीरा में। जी हां, इस फिल्म में शबाना आज़मी शशि कपूर के अपोज़िट नज़र आई थी।

हॉलीवुड तक बजाया डंका

शबाना आज़मी ने कई हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया है। इनफैक्ट कहना ये चाहिए, कि शबाना आज़मी आजकल हॉलीवुड में ही ज़्यादा एक्टिव हैं। 

शबाना ने मैडम सुशात्ज़का, द बंगाल नाइट, सिटी ऑफ जॉय, इमैक्यूलेट कनस्पैश्न, सन ऑफ पिंक पैंथर, कस्टडी, द ब्लैक प्रिंस, द विशिंग ट्री, सिग्नेचर मूव, द रिलक्टैंट फंडामेंटलिस्ट, मिडनाइट्स चिल्ड्रन, इट्स ए वंडरफुल आफ्टरलाइफ, वॉटरबोर्न, साइड स्ट्रीट्स जैसी इंटरनेशनल फिल्मों में काम किया है और अपने टैलेंट का डंका दुनियाभर में बजाया है। 

यही वजह है कि शबाना आज़मी ने अपने करियर में कुछ इंटरनेशनल अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए हैं। हालांकि ये बात अलग है कि शबाना को ये इंटरनेशनल अवॉर्ड्स किसी इंटरनेशनल फिल्म के लिए नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म के लिए मिले हैं। 

जैसे अर्थ और पतंग के लिए शबाना को टाओरमिला आर्ट फैस्टिवल इटली की तरफ से बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब दिया गया था। वहीं फायर के लिए शिकागो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में शबाना को बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब दिया गया था।

शबाना का रिकॉर्ड तोड़ नाटक

शबाना आज़मी ने 'तुम्हारी अमृता' नाम के एक नाटक के लिए बहुत सुर्खियां बटोरी थी। इस नाटक में उनके साथ फारुख़ शेख ने काम किया था। 

शबाना आज़मी और फारुख़ शेख का ये नाटक पूरे 21 साल तक चला था। और अभिनेता फारुख़ शेख की डेथ के बाद ही इस नाटक का मंचन रोका गया था। 

इस नाटक से जुड़ी एक रोचक बात ये है कि सन 1993 में जब शबाना आज़मी मुंबई में इस नाटक का मंचन करने जा रही थी तो पुलिस ने शबाना आज़मी को किसी आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। 

इस नाटक की शुरुआत छह बजे होनी थी। लेकिन पुलिस की कस्टडी में बैठी शबाना वेन्यू तक जब नहीं आई तो शो के ऑर्गनाइज़र्स ने नाटक देखने आए लोगों को रिफंड की पेशकश की। 

लेकिन लोगों ने रिफंड लेने से इन्कार कर दिया। फिर किसी तरह 8 बजे शबाना पुलिस की कस्टडी से छूटकर नाटक हॉल तक पहुंची और नाटक शुरू किया। और जब नाटक खत्म हुआ तो लोगों ने शबाना आज़मी और फारुख़ शेख को स्डैंटिंग ओविएशन दिया। 

जब कांग्रेस सरकार पर बुरी तरह भड़की शबाना

एक वक्त पर शबाना आज़मी पॉलिटिकली और सोशली काफी एक्टिव रही हैं। साल 1989 में जब देश की राजधानी दिल्ली में 12वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया था तो शबाना आज़मी ने उस वक्त की कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया था। 

दरअसल, उन्हीं दिनों मुकेश शर्मा नाम के एक कांग्रेसी नेता के गुंडों ने उस दौर के प्रख्यात नाटककार सफदर हाशमी की हत्या कर दी थी। 

इसकी वजह से देश के थिएटर कलाकारों के मन में उस वक्त कांग्रेस सरकार के ख़िलाफ ज़बरदस्त रोष था। सफदर हाशमी कम्यूनिस्ट विचारधारा के व्यक्ति थे। और शबाना आज़मी भी कम्यूनिस्ट विचारधारा से काफी प्रभावित थी। 

स्कूल में चबा गई थी नीला थोथा

शबाना की मां शौकत कैफ़ी ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में उनके बचपन का एक किस्सा शेयर कहते हुए लिखा था कि बचपन में शबाना को सब प्यार से मुन्नी और उनके छोटे भाई को बाबा कहते थे। 

नन्ही शबाना यानि मुन्नी को लगता था कि उनकी मां उनसे ज़्यादा उनके छोटे भाई बाबा को प्यार करती हैं। एक दफा शबाना और उनका भाई ब्रेकफास्ट कर रहे थे। 

तभी शबाना की मां शौकत ने शबाना की प्लेट से एक टोस्ट उठाकर उनके छोटे भाई की प्लेट में रख दिया और कहा कि उसकी स्कूल बस आने वाली है और तुम्हारी बस आने में अभी थोड़ा टाइम है। इसलिए तुम अपना टोस्ट अपने छोटे भाई को दे दो। 

शौकत ने नौकर से शबाना के लिए एक और टोस्ट बनाकर लाने को कहा। लेकिन शबाना को ये बात बहुत बुरी लगी। वो चुपचाप डाइनिंग टेबल से उठकर चली गई और बाथरूम में रोने लगी। मां शौकत ने जब उनके रोने की आवाज़ सुनी तो वो दौड़कर बाथरूम में गई। 

लेकिन चूंकि तब तक शबाना स्कूल ड्रैस पहन चुकी थी तो मां के आते ही वो बिना उनसे कुछ बोले स्कूल चली गई। बाद में शौकत को शबाना की एक दोस्त ने बताया कि आज शबाना ने स्कूल में नीला थोथा यानि कॉपर सल्फेट खा लिया था।

जब रेल से कटते-कटते बची थी शबाना

शबाना बचपन में काफी ज़िद्दी थी। उनकी ज़िदों से परेशान होकर एक दिन गुस्से में उनकी मां शौकत ने उन्हें घर से चले जाने को कह दिया। मां को लगा कि शबाना डर जाएंगी और सुधर जाएंगी। लेकिन शबाना सच में उस दिन घर छोड़कर चली गई। 

शबाना किसी तरह ग्रांट रोड रेलवे स्टेशन पहुंच गई और वहां उन्होंने ट्रेन के सामने आकर अपनी जान देने की कोशिश की। लेकिन इत्तेफाक से उस वक्त वहां उनके स्कूल का वॉचमैन भी मौजूद था। 

वो वॉचमैन शबाना को पहचान गया। उसने शबाना को रेल के सामने आने से रोक लिया और उन्हें अपने साथ ही उनके घर ले आया। 

घर आकर जब शबाना की मां शौकत को वॉचमैन ने स्टेशन का सारा किस्सा बताया तो शबाना की मां अपना सिर पकड़कर बैठ गई। और उन्होंने उस दिन तय कर लिया कि शबाना जो मर्ज़ी आए करें, लेकिन अब वो शबाना को कभी नहीं डाटेंगी। 

शबाना आज़मी की कॉफी शॉप

शबाना ने सीनियर कैंब्रिज की परीक्षा फर्स्ट डिविज़न में पास की थी। सीनियर कैंब्रिज को आप इंटरमीडिएट मान सकते हैं। इसके बाद शबाना को कॉलेज में दाखिला लेना था। लेकिन उसमें पूरे तीन महीने का वक्त था। 

और इस वक्त में शबाना ने फैसला किया कि वो अपने घर के पास के एक पेट्रोल पंप पर ब्रूय कॉफी बेचा करेंगी। फिर पूरे तीन महीने तक शबाना ने उस पेट्रोल पंप पर कॉफी बेची। उस वक्त शबाना को एक दिन में पूरे तीस रुपए की बचत होती थी। 

शबाना पेट्रोल पंप पर कॉफी बेच रही हैं ये बात उनके माता-पिता को नहीं पता थी। फिर जब एक दिन शबाना ने तीन महीने की अपनी ये कमाई अपनी मां शौकत कैफ़ी को दी तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

शेखर शबाना की अधूरी मुहब्बत

शबाना आज़मी और जावेद अख्तर की शादी पर काफी गॉसिप्स हुई थी। वजह थी जावेद अख्तर का पहले से शादीशुदा होना। इस शादी से खुद शबाना के पिता कैफ़ी आज़मी भी बहुत नाराज़ हुए थे। 

हालांकि ये बात बहुत ही कम लोग जानते हैं कि शबाना आज़मी किसी ज़माने में जाने-माने फिल्म डायरेक्टर शेखर कपूर के साथ रिलेशन में थी। 

दोनों शादी भी करना चाहते थे। लेकिन फिर किसी बात पर दोनों का ब्रेकअप हो गया। हालांकि पर्सनल रिलेशन के चलते शबाना और शेखर के प्रोफेशनल रिलेशन कभी खराब नहीं हुए। 

शेखर कपूर से ब्रेअकप के बाद भी शबाना ने उनकी एक फिल्म में काम किया था। और इत्तेफाक से उस वक्त तक शेखर कपूर मेधा से शादी कर चुके थे। शेखर की वाइफ मेधा उस फिल्म की असिस्टेंट डायरेक्टर थी।  

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