Late Bollywood Actress Chand Usmani Biography | गुज़रे ज़माने की खूबसूरत अदाकारा चांद उस्मानी की जीवनी
1950 के दशक की शुरुआत में ए.आर.कारदार ने एक टैलेंट हंट का आयोजन किया था। उस टैलेंट हंट की विजेता कौन थी, इसको लेकर तो कन्फ़्यूज़न है। मगर उसमें दूसरे स्थान पर रही थी चांद उस्मानी। उस टैलेंट हंट में अनिता गुहा व शुभा खोटे जी ने भी हिस्सा लिया था।
अनिता गुहा ये कहती थी कि उस टैलेंट हंट की विजेता वही थी। जबकी पीस कंवल ने कहा था कि वो उस टैलेंट हंट की विजेता हैं। खैर, इस कन्फ़्यूज़न को एक तरफ़ छोड़कर, हम बात करेंगे चांद उस्मानी के बारे में।
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| Late Bollywood Actress Chand Usmani Biography - Photo: Social Media |
चांद उस्मानी के जन्म की तारीख बताई जाती है 03 जनवरी 1933. इनका जन्म आगरा में रहने वाले एक पठान खानदान में हुआ था। चांद जी का पूरा नाम था चांद बीबी खानम उस्मानी। फिल्मों में आने के बाद उनका नाम सिर्फ चांद उस्मानी रह गया।
चूंकि चांद उस्मानी कारदार द्वारा आयोजित कराए गए उस टैलेंट हंट में दूसरे स्थान पर रही थी तो कारदार ने चांद उस्मानी को भी जीवन ज्योति नामक एक फिल्म से इंडस्ट्री में लॉन्च किया।
उसी फिल्म से शम्मी कपूर साहब के करियर का आगाज़ भी हुआ था। वो फिल्म साल 1953 में रिलीज़ हुई थी। फिल्म को महेश कौल ने डायरेक्ट किया था।
चांद उस्मानी जिस खानदान में जन्मी थी वहां अधिकतर लोग पढ़े-लिखे ही थे। डिग्रियां तो चांद उस्मानी भी हासिल करना चाहती थी। लेकिन फिल्मों में आने की वजह से उनका वो ख्वाब अधूरा ही रहा।
बताया जाता है कि चांद उस्मानी को जीवनभर इस बात का दुख रहा कि वो ज़्यादा पढ़-लिख नहीं पाई। फिल्मी करियर में भी चांद उस्मानी को वो ऊंचाईयां कभी ना मिल सकी जिसका ख्वाब लेकर वो फिल्मी दुनिया में आई थी।
चंद फिल्मों बहैसियत हीरोइन ये ज़रूर नज़र आई। लेकिन बाद में सिर्फ सपोर्टिंग एक्ट्रेस बनकर ही रह गई। तबस्सुम गोविल जी को दिए एक इंटरव्यू में चांद उस्मानी ने कहा था कि उनसे भी करियर में एक गलती हुई थी। उन्होंने कभी कोई सेक्रेटरी नहीं रखा।
सेक्रेटरी लोगों की ज़िम्मेदारी होती है कि वो अपने एक्टर के लिए अच्छे किरदारों का चुनाव करें। पर चूंकि उन्होंने कभी कोई सेक्रेटरी रखा ही नहीं तो उन्हें जैसे रोल मिले वो खुद ही उन्हें साइन करती चली गई।
कोई चार दशक लंबे अपने करियर में चांद उस्मानी ने काम तो बड़ी-बड़ी फिल्मों में किया था। लेकिन वो टॉप मोस्ट हीरोइन कभी ना बन सकी। चांद उस्मानी की कई फिल्में उनकी मृत्यु के बाद भी रिलीज़ हुई थी।
2008 में रिलीज़ हुई यार मेरी ज़िंदगी नाम की फिल्म में चांद उस्मानी जी आखिरी दफ़ा नज़र आई थी। और ये फिल्म कई साल लेट रिलीज़ हुई थी। इसमें अमिताभ बच्चन व शत्रुघ्न सिन्हा थे।
चांद उस्मानी ने डायरेक्टर मुकुल दत्त से शादी की थी। ये मुकुल दत्त ही थे जिन्होंने राजेश खन्ना की फिल्म आन मिलो सजना का डायरेक्शन किया था।
मुकुल दत्त लेखक भी थे। वो बंगाली सिनेमा के लिए कहानियां व गीत लिखा करते थे। मुकुल दत्त व चांद उस्मानी का एक बेटा हुआ था जिसका नाम है रोशन।
चांद उस्मानी माहिम में रहा करती थी। वो अपने घर में एक हाफवे हाउस चलाती थी। ये एक ऐसा घर था जो दूसरे शहरों से फिल्म इंडस्ट्री में करियर बनाने का सपना लिए मुंबई आई लड़कियों को शरण देता था।
26 नवंबर 1989 को कैंसर के चलते मात्र 56 बरस की उम्र में चांद उस्मानी ये दुनिया छोड़ गई थी। मेरठ मंथन चांद उस्मानी जी को ससम्मान याद करते हुए उन्हें नमन करता है।

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