Dilip Dhawan को आज सब भूल चुके हैं। लेकिन बहुत दमदार Actor थे बहुत | Biography

एक शानदार लेकिन बदनसीब अभिनेता, जो मौत के चुंगल में बहुत जल्दी फंस गया। मात्र 45 साल की उम्र में हार्ट अटैक की वजह से इनकी मृत्यु हो गई।

जीवित होते तो शायद आज भी फ़िल्मों में सक्रिय होते। और अब शायद अच्छे किरदार निभा रहे होगे। क्योंकि उस वक्त तो इन्हें बहुत ज़्यादा फ़िल्में तो ऐसी नहीं मिली थी जिनमें इनके किरदार सशक्त हों।

दिलीप धवन। नुक्कड़ धारावाहिक जिन लोगों ने खूब देखा होगा उन्हें दिलीप धवन का निभाया गुरू का किरदार भी बहुत अच्छे से याद होगा। दिलचस्प किरदार था वो। सन 1955 में दिलीप धवन का जन्म हुआ था।

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Biography of Actor Dilip Dhawan - Photo: Social Media

दिलीप धवन के पिता भी अभिनेता थे। उनका नाम था कृष्ण धवन। दिलीप धवन की मृत्यु के मात्र छह साल पहले ही कृष्ण धवन का देहांत हुआ था। कृष्ण धवन को भी आपने तमाम फ़िल्मों में देखा होगा। अभी शायद उनका चेहरा आपको याद नहीं आ रहा होगा।

लेकिन अगर आपने देव साहब की फ़िल्म टैक्सी ड्राइवर देखी होगी तो उस फ़िल्म का वो गुंडा आपको ज़रूर याद होगा जो बार-बार देव साहब से उलझने की कोशिश करता रहता है।

वो कृष्ण धवन ही थे। या फिरोज़ खान की धर्मात्मा अगर आपने देखी होगी तो उसमें रेखा के पिता का किरदार जिन्होंने निभाया था वो कृष्ण धवन ही थे।

खैर, बात दिलीप धवन के बारे में करते हैं। दिलीप धवन को लोग राजेश खन्ना की फ़िल्म स्वर्ग में उनके छोटे भाई रवि का किरदार दिलीप धवन ने ही निभाया था।

चूंकि पिता इनके एक्टर थे तो एक्टिंग का शौक इन्हें भी छोटी उम्र में ही हो गया था। जैसे ही इनकी पढा़ई-लिखाई पूरी हुई, ये एक्टिंग की बारीकियां सीखने पूना स्थित फ़िल्म एंड टेलिविज़न इंस्टिट्यूट यानि FTII आ गए।

हालांकि बाल कलाकार के तौर पर तो वो पहले ही दिलीप धवन एक फ़िल्म में काम कर चुके थे। उस फ़िल्म का नाम था संघर्ष। वही संघर्ष जिसमें बलराज साहनी, दिलीप कुमार व संजीव कुमार जैसे दिग्गज एक्टर्स थे। दिलीप धवन ने दिलीप कुमार के बचपन का किरदार संघर्ष में निभाया था।

FTII से दो साल का एक्टिंग का डिप्लोमा लेकर दिलीप धवन मुंबई आए। वो हीरो बनना चाहते थे। मगर उन्हें कोई ढंग की फ़िल्म नहीं मिली। चूंकि पर्सनैलिटी दिलीप की शानदार थी तो उन्होंने मॉडलिंग शुरू कर दी।

मॉडलिंग उन्हें थोड़ा फ़ायदा दे गई। डायरेक्टर सईद अख्तर मिर्ज़ा ने दिलीप धवन को अपनी फ़िल्म "अरविंद देसाई की अजीब दास्तान" में लीड रोल निभाने के लिए साइन कर लिया।

उसके बाद दिलीप धवन कई और फ़िल्मों में दिखे। जैसे अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है, एक बार कहो, सज़ाए मौत, आगमन, बड़े दिलवाला इत्यादि। लेकिन वो हीरो ना बन सके। चरित्र किरदार निभाने वाले एक्टर बनकर रह गए। और इस बात का दुख उन्हें हमेशा रहता था। 

साल 1990 में एक फ़िल्म आई थी जिसका नाम था इज़्जतदार। गोविंदा इस फ़िल्म के हीरो थे। और दिलीप कुमार भी इस फ़िल्म में एक अहम किरदार में थे। दिलीप धवन को भी इस फ़िल्म में काम मिला था।

इस तरह सालों बाद दिलीप धवन ने फ़िर से एक ऐसी फ़िल्म में काम किया जिसमें दिलीप कुमार थे। और इस दफ़ा तो उन्हें दिलीप साहब के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिला।

दिलीप धवन इसके बाद और कुछ बड़ी फ़िल्मों में भी दिखे थे जैसे तहलका, मदहोश, चौराहा, यश, विरासत, बदमाश, हम साथ साथ हैं इत्यादि।

बात अगर टीवी शोज़ की करें तो नुक्कड़ के अलावा पुकार, लोग क्या कहेंगे व नया नुक्कड़ में भी दिलीप धवन नज़र आए थे। मगर टेलिविज़न पर भी उन्हें बहुत ख़ास सफ़लता नहीं मिल सकी थी।

दिलीप धवन ने एक फ़िल्म भी प्रोड्यूस की थी। साल 1989 में आई फ़िल्म साथ-साथ दिलीप धवन ने ही प्रोड्यूस की थी। ये वही फ़िल्म है जिसमें जगजीत सिंह की गाई गज़ल "तुमको देखा तो ये ख्याल आया" थी। इस फ़िल्म के हीरो-हीरोइन फ़ारुख़ शेख़ व दीप्ति नवल थे।

दिलीप धवन ने कभी शादी नहीं की थी। वो कहते थे कि उन्हें कभी ये सोचने की फ़ुर्सत नहीं मिल सकी कि उन्हें शादी भी करनी चाहिए।

ना ही उन्होंने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि उन्होंने पैसा कितना कमाया। और फ़िर एक दिन(15 फ़रवरी 2000) दिलीप धवन को एक तेज़ हार्ट अटैक आया। और वो ये दुनिया छोड़कर चले गए।

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