25 Interesting Points about Dil Se | शाहरुख-मनीषा की क्लासिक फ़िल्म 'दिल से' की 25 विशेषताएं

Dil Se. 21 अगस्त 1998 को जब 'दिल से' रिलीज़्ड हुई थी, तब भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। लेकिन हैरतअंगेज़ रूप से दिल से ने इंटरनेशनली बहुत ज़्यादा सफलता हासिल की थी। 

और ये पहली भारतीय फिल्म थी जो यूके बॉक्स ऑफिस की टॉप 10 फिल्मों में लिस्ट में शामिल हुई थी। 'दिल से' का साउंड ट्रैक उस वक्त ग्लोबल सैंसेशन बन गया था। खासतौर पर छैया छैया सॉन्ग ने तो पूरी दुनिया में धूम मचाई थी। 

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25 Interesting Points about Dil Se - Photo: Social Media

Meerut Manthan Dil Se Movie से जुड़े उन 25 Points का ज़िक्र करेगा जो ये साबित करते हैं कि 'दिल से' वाकई में एक मास्टरपीस मूवी थी। 

मणिरत्नम

'दिल से' का पहला सबसे स्ट्रॉन्ग पॉइन्ट है खुद इसके डायरेक्टर मणिरत्नम साहब। मणि रत्नम भारत के टॉप फिल्म डायरेक्टर्स में यूं ही नहीं गिने जाते। अपनी हर फिल्म में मणिरत्नम इंडस्ट्री का बेस्ट लेते हैं। फिर चाहे वो म्यूज़िक डायरेक्टर हो, राइटर्स हों या फिर एक्टर्स हों। 

यहां तक की टैक्निकल क्र्यू में भी मणिरत्नम केवल उन्हीं लोगों को अपने साथ रखते हैं जो इंडस्ट्री के बैस्ट हों। इसलिए ज़ाहिर है, दिल से फिल्म को तो शानदार बनना ही था। .

वैसे आपको बता दें कि मणिरत्नम बेहतरीन राइटर भी हैं। और 'दिल से' की कहानी और स्क्रीनप्ले मणिरत्नम ने खुद लिखे थे। जबकी दिल से के डायलॉग्स लिखे थे तिग्मांशू धूलिया ने। 

तीसरी किश्त

'दिल से' मणिरत्नम की एक खास सीरीज़ की तीसरी और आखिरी किश्त है। और इसिलिए इस फिल्म को रोजा व बॉम्बे के बाद इस सीरीज़ की ट्रिलोजी कहा जाता है। 

रोजा व बॉम्बे के बाद दिल से ही मणिरत्नम की बनाई वो तीसरी फिल्म थी जिसने इंडियन सिनेमा को यूनीकनेस दी। और ये यूनीकनेस स्टोरी टैलिंग और पॉलिटिक्स की टर्म में मानी जाती है। 

दिल से के ज़रिए शाहरुख को भी अपने एक्टिंग पोटैंशियल को दिखाने का एक शानदार मौका मिला था।

सिनेमैटोग्राफी

'दिल से' फिल्म की खासियतों की बात होगी तो इस फिल्म की सिनेमैटोग्राफी की बात भी ज़रूर होगी। जिसे अंजाम दिया था संतोष सिवान ने। जानकार तो कहते हैं कि दिल से में संतोष सिवान ने जो सिनेमैटोग्राफी की है वो अपने आप में एक मास्टरपीस है। 

यही वजह है कि दिल से के रिलीज़ होने के बाद संतोष सिवान की बहुत तारीफ हुई थी। और उनकी इस सिनेमैटोग्राफी के लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स से सम्मानित भी किया गया था। जिनमें सबसे प्रमुख था बेस्ट सिनेमैटोग्राफी का नेशनल अवॉर्ड, जो उन्हें 46वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के दौरान दिया गया था।

मुहब्बत के सात रंग

यूं तो पहली नज़र में 'दिल से' किसी भी आम प्रेम कहानी वाली फिल्म जैसी ही दिखती है। लेकिन वास्तव में दिल से आम प्रेम कहानी वाली फिल्मों से काफी अलग है। 

फिल्म देख चुके काफी कम लोग ही इस बात को नोटिस कर पाए होंगे कि शाहरुख खान ने इस फिल्म में मुहब्बत के सात रंगों की यात्रा की थी। 

और जिन सात रंगों की यात्रा शाहरुख ने दिल से फिल्म में की है उनका ज़िक्र एनसिएंट ऐरेबिक लिटरेचर यानि प्राचीन अरबी साहित्य में भी किया गया है। ये रंग हैं कशिश, दीवानगी, इश्क, इज़्ज़त, इबादत, जुनून और मौत। 

पॉलिटिक्स

'दिल से' एक ऐसी फिल्म है जो अपने वक्त के सियासी माहौल, खासतौर पर नॉर्थ ईस्ट के माहौल के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। पूरी फिल्म में राजनीतिक मैसेजेस की भरमार है। 

बस थोड़ा ध्यान देने की ज़रूरत है। दिल से में बताया गया है कि कैसे माइनोरिटीज़ को समाज के फ्रिंज एलिमेंट्स द्वारा प्रताड़ित किया जाता है। 

सरकार कैसे अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने में नाकाम रहती है। समाज किस कदर बंट जाता है। सामाजिक दबाव कैसे काम करता है। व और भी कई तरह की राजनीतिक परिस्थितियों को फिल्म में खूबसूरती से चित्रित किया गया है।

कंट्रास्ट

'दिल से' की कहानी में हमें हीरो व हीरोइन के बीच जिस तरह का कंट्रास्ट यानि विरोधाभास नज़र आता है, वैसा बहुत ही कम बॉलीवुड फिल्मों में दिखा है। 

आमतौर पर बॉलीवुडिया फिल्मों में हीरो व हीरोइन के बीच किसी तरह का कोई विरोधाभास नहीं होता। लेकिन 'दिल से' में है। जहां दिल से का हीरो एक रेडियो शो को होस्ट है और जिसकी नस नस में राष्ट्रभक्ति की भावना भरी है। 

तो वहीं हीरोइन के साथ पास्ट में ऐसा कुछ हुआ है कि वो एक आतंकवादी संगठन से जुड़ जाती है। फिल्म की कहानी ऐसे चलती है कि आगे क्या होगा इसका अंदाज़ा लगा पाना एक दर्शक के लिए मुश्किल हो जाता है। 

फिल्म का अंत

'दिल से' की एंडिंग काफी अलग है। एकदम हटकर। वो लोग जिन्होंने 'दिल से' को सिनेमाघरों में देखा होगा, वो इस बात से इन्कार नहीं कर सकते कि दिल से जैसी पावरफुल एंडिंग उन्होंने और किसी फिल्म की नहीं देखी होगी। 

फिल्म का हीरो के सामने जब ये सवाल खड़ा होता है कि उसे अपनी मुहब्बत या फिर राष्ट्रहित में से किसी एक को चुनना होगा, तो वो एक ऐसा कदम उठाता है जो हर किसी के बस की बात नहीं है। 

मनीषा कोईराला

'दिल से' फिल्म मनीषा कोईराला के करियर की टॉप 5 फिल्मों में शुमार की जानी चाहिए। 'दिल से' मणिरत्नम के डायरेक्शन में मनीषा कोईराला की दूसरी फिल्म है। 

इससे पहले साल 1995 की बॉम्बे फिल्म में मनीषा ने मणिरत्नम के डायरेक्शन में काम किया था। 

और वो फिल्म भी मनीषा के शानदार काम लिए हमेशा याद की जाएगी। मनीषा कोईराला ने बॉलीवुड फिल्मों में हिरोइन की इमेज को काफी हद तक बदल दिया था। 

शाहरुख खान

वैल, ये शाहरुख खान के स्टारडम का ही जलवा था कि 'दिल से', जो कि भारत में बॉक्स ऑफिस पर फेल्ड साबित हुई थी, वो इंटरनेशनल ऑडियंस को सिनेमाघरों तक खींच लाई। 

जबकी इस फिल्म में शाहरुख ने अपनी इमेज के एकदम उलट काम किया था। जिस दौर में 'दिल से' रिलीज़ हुई थी उस वक्त शाहरुख की इमेज एक चॉकलेटी हीरो की थी। 

वो अपनी रोमांटिक इमेज के लिए मशहूर थे। लेकिन 'दिल से' में शाहरुख ने जो परफॉर्मेंस दी उससे साबित हो गया कि वो रोमांस ज़ोनरा से हटकर फिल्मों में भी बेहतरीन एक्टिंग कर सकते हैं।

छैया-छैया

भारत में 'दिल से' फिल्म की चर्चा सबसे ज़्यादा हुई थी छैया छैया गीत की वजह से। एक तो गीत बहुत शानदार था। दूसरे गीत का पिक्चराइजेशन भी अपने आप में यूनीक था। 

ये पहला मौका था जब चलती ट्रेन पर किसी फिल्म के गीत को शूट किया गया था। इससे पहले शायद ही किसी भारतीय फिल्म में किसी गीत को इस तरह चलती ट्रेन पर शूट किया गया हो। 

शायद इसलिए क्योँकि कुछ लोग दावा करते हैं कि 'दिल से' फिल्म से पहले भी चलती ट्रेन पर गीत फिल्माया जा चुका है। लेकिन वो कौन सा गीत था और किस फिल्म का गीत था, ये हमें तो नहीं पता चल सका।

सुखविंदर सिंह

'दिल से' का सबसे मशहूर गीत छैया छैया गायक सुखविंदर सिंह ने गाया था। तो ज़ाहिर है इस फिल्म की चर्चा के दौरान सुखविंदर सिंह का नाम तो आएगा ही। सुखविंदर सिंह को ऊपर वाले ने बहुत ही अनोखी और खूबसूरत आवाज़ बख्श़ी है। 

यही वजह है कि जब 'दिल से' का म्यूज़िक रिलीज़ हुआ तो हर कोई सुखविंदर सिंह का फैन हो गया। कहना चाहिए कि ये गीत सुखविंदर सिंह स्टार मेकिंग साबित हुआ था। 

इससे पहले भारतीय दर्शकों ने हाई एनर्जी वॉकल्स को इतने फ्रैश व नए अंदाज़ में नहीं सुना था। वैसे छैया छैया गीत के फीमेल वॉकल्स देने वाली गायिका सपना अवस्थी की भी हमें प्रशंसा करनी चाहिए। उन्होंने भी बहुत खूबसूरती के साथ इस गीत को गाया था।

इंस्पीरेशन

'दिल से' कई लोगों के लिए इंस्पीरेशन भी रही है। जैसे कि फेमस ब्रिटिश म्यूज़िक कंपोज़र एंड्र्यू लॉयड वेबर के लिए। दरअसल, एंड्र्यू लॉयड वेबर ने अर्ली 2000 में बॉम्बे ड्रीम्स नाम का एक थिएटरीकल म्यूज़िक ग्रुप इस्टैब्लिश किया था। 

इस ग्रुप में नामी भारतीय कंपोज़र और 'दिल से' के म्यूज़िक डायरेक्टर एआर रहमान भी जुड़े थे। वेबस इस ग्रुप के प्रोड्यूसर थे। 

तब वेबर को 'दिल से' का छैया छैया गीत इतना पसंद आया था कि उन्होंने एआर रहमान से इस गीत को ग्रुप का हिस्सा बनाने के लिए स्पेशल रिक्वेस्ट की थी। दो सालों तक लंदन में बॉम्बे ड्रीम्ज़ ने ढेरों शोज़ किए। और उन शोज़ की जान हुआ करता था छैया छैया सॉन्ग।

साउंडट्रैक

वैसे 'दिल से' का सबसे पॉप्युलर ट्रैक छैया छैया ही था। आज भी 'दिल से' का ज़िक्र आते ही लोगों के ज़ेहन में ट्रेन की छत पर छैया छेैया गीत की धुन पर थिरकते शाहरुख खान की छवि ही उभरती है। लेकिन फिल्म के दूसरे सॉन्ग्स भी मास्टरपीस थे। जिया जले, सतरंगी रे, ऐ अजनबी व दिल से रे। 

'दिल से' का पूरा म्यूज़िक एल्बम आप किसी बढ़िया से म्यूज़िक सिस्टम पर सुन लीजिए। आपको आज भी वही फ्रेशनेस इन सॉन्ग्स में महसूस होगी, जो तब थी जब ये फिल्म रिलीज़ हुई थी।

रहमान-रत्नम की जोड़ी

भारतीय सिनेमा की कुछ सबसे शानदार जोड़ियों में से एक है एआर रहमान व मणिरत्नम की जोड़ी। इस जोड़ी ने कुछ बहुत ही शानदार फिल्मों में साथ काम किया है। 

जैसे रोजा, बॉम्बे, साथिया, युवा, गुरू, रावण और ओके जानू। ये तो वो फिल्में हैं जिनसे हिंदी भाषी दर्शक भी अच्छी तरह से वाकिफ हैं। 

कई तमिल फिल्में भी ऐसी हैं जो रहमान और रत्नम की जोड़ी की शानदार क्रिएशन हैं। ज़ाहिर है, 'दिल से' का म्यूज़िक इतना शानदार इसिलिए है क्योंकि इस फिल्म को रहमान-रत्नम की सुपर्ब जोड़ी मिली।

गुलज़ार

'दिल से' को मास्टरपीस बनाने में इसकी कहानी के साथ-साथ म्यूज़िक का बहुत बड़ा हाथ है। एआर रहमान ने इस फिल्म में अपना बेस्ट दिया है। 

लेकिन बिना गुलज़ार साहब के 'दिल से' इतनी गुलज़ार हो ही नहीं सकती थी। गुलज़ार साहब ने ही 'दिल से' के सभी गीत लिखे थे। और ये गुलज़ार साहब की कलम का ही जादू है कि 'दिल से' के सभी गीतों के बोल बहुत रूहानी महसूस होते हैं। 

गुलज़ार साहब के शब्दों को रहमान साहब ने बहुत खूबसूरती से संगीतबद्ध किया। छैया छैया गीत के लिए तो गुलज़ार साहब को फिल्मफेयर बेस्ट लिरिसिस्ट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।

कोरियोग्राफी

'दिल से' के छैया छैया गीत को कोरियोग्राफ किया था फराह खान ने। और फराह खान को उनकी शानदार कोरियोग्राफी के लिए फिल्मफेयर बेस्ट कोरियोग्राफर का अवॉर्ड भी दिया गया था। 

लेकिन ये बात भी हमें माननी चाहिए कि 'दिल से' में फराह खान ने जैसा काम किया था उसके लिए वो और ज़्यादा डिज़र्व करती थी। चलती ट्रेन के पर किसी सॉन्ग को पहले कभी कोरियोग्राफ नहीं किया गया था। 

ये फराह की स्किल्स थी कि उन्होंने सक्सेसफुली छैया छैया सॉन्ग को चलती रेलगाड़ी पर कोरियोग्राफ कर लिया। वैसे जिया जले जान चले कि कोरियोग्राफी के लिए भी फराह खान की तारीफ करनी होगी।

साउंड

नो डाउट, 'दिल से' के विज़ुअल्स और सॉन्ग्स इसे काफी रिच बनाते हैं। लेकिन 'दिल से' की साउंड डिज़ाइनिंग यानि ऑडियोग्राफी भी अपने आप में यूनीक है। 'दिल से' फिल्म में इसके साउंड ने एक तरह से एक कैरेक्टर प्ले किया है। 

एक ऐसा कैरेक्टर जो दर्शकों को दिखाई नहीं देता। सिर्फ सुनाई देता है। दर्शक भी उस कैरेक्टर को सिर्फ सुनकर ही एक्सायटेड होते हैं। 'दिल से' की ऑडियोग्राफी की थी ए.श्रीधर ने। और 'दिल से' की शानदार ऑडियोग्राफी के लिए ए.श्रीधर को बेस्ट ऑडियोग्राफी का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। 

क्लासिक डेब्यू

'दिल से' प्रीति जिंटा की डेब्यू फिल्म थी। यानि बिना किसी संकोच के ये कहा जा सकता है कि प्रीति जिंटा खुशकिस्मत हैं कि उन्हें 'दिल से' जैसी मास्टरपीस फिल्म से डेब्यू करने का मौका मिला। 

'दिल से' में प्रीति जिंटा ने एक सपोर्टिंग कैरेक्टर प्ले किया था। प्रीति के काम को दर्शकों ने बहुत पसंद किया था। जिया जले सॉन्ग में प्रीति के एक्स्प्रेशन्स प्राइसलैस थे।

लोकेशन्स

'दिल से' फिल्म को इसकी शूटिंग लोकेशन्स भी कंटेंटवाइज़ काफी रिच बनाती हैं। 'दिल से' की शूटिंग हिमाचल प्रदेश, लेह, लद्दाख, असम, दिल्ली और केरल की बेस्ट लोकेशन्स पर हुई थी। 

और इन सभी जगहों के वो नज़ारे 'दिल से' फिल्म में देखने को मिले थे जो पहले कभी किसी और फिल्म में नहीं देखे गए थे। यानि फिल्म को हर एंगल से परफेक्ट बनाने के लिए ज़बरदस्त मेहनत की गई थी।

डिबेट

'दिल से' की रिलीज़ के बाद इसे लेकर काफी डिबेट और डिस्कशन्स हुए थे। शानदार विज़ुअल्स, दमदार स्टोरी लाइन, बेहतरीन म्यूज़िक और कलाकारों की खूबसूरत परफॉर्मेंस की चर्चा के साथ जब इस फिल्म की कहानी पर भी देश में डिस्कशन होना शुरू हुआ तो इसने 'दिल से' के महत्व को काफी बढ़ा दिया। 

देश के एक खास इलाके की पॉलिटिकल सिचुएशन पर हर तरफ बातें होने लगी। यानि इस फिल्म ने वो काम किया जो अक्सर कॉमर्शियल फिल्में नहीं करती हैं। 

भाषा

'दिल से' को केवल हिंदी में ही नहीं, कुछ दूसरी भारतीय भाषाओं में भी रिलीज़ किया गया। ये फिल्म तमिल, तेलुगू और मलायलम भाषा में भी रिलीज़ की गई। 

और केवल फिल्म की कहानी, बल्कि फिल्म के सभी गीत भी इन भाषाओं में लिखे व रिकॉर्ड किए गए थे। इस तरह शायद 'दिल से' पहली फिल्म थी जिसने मेकर्स को अपनी फिल्म पैन इंडिया रिलीज़ करने के लिए प्रेरित किया।

निगेटिविटी से लड़ाई

'दिल से' अपने वक्त से काफी आगे की फिल्म थी। शायद इसिलिए इस फिल्म की रिलीज़ के वक्त उस दौर के कई क्रिटिक्स ने बहुत निगेटिव रिव्यूज़ दिए थे। 

इन्हीं निगेटिव रिव्यूज़ की वजह से 'दिल से' भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत में उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। लेकिन फिल्म ने इन रिव्यूज़ का सामना किया। 

और साबित किया कि अच्छी फिल्म दर्शकों को पसंद आती ही आती है। फिर चाहे उसकी कोई कितनी भी बुराई क्यों ना करे।

बॉक्स ऑफिस

ये सच है कि 'दिल से' को भारत में कुछ खास सफलता नहीं मिल पाई थी। लेकिन 'दिल से' ही पहली भारतीय फिल्म थी जिसने यूके बॉक्स ऑफिस की टॉप 10 लिस्ट में जगह बनाई थी। 

ज़ाहिर है 'दिल से' की इस अचीवमेंट ने बॉलीवुड का हौंसला काफी बढ़ाया था। और बॉलीवुड को यकीन हो गया था कि भारतीय फिल्में भी ऐसी सफलताएं हासिल कर सकती हैं। 

इंटरनेशनल

'दिल से' ने केवल यूके में ही नहीं, बल्कि और भी कई पश्चिमी देशों में धूम मचाई थी। इस फिल्म को पोलैंड के ईरा न्यू हॉराइज़न फिल्म फैस्टिवल में स्क्रीन किया गया था। 

हेलसिंकी इंटनेरशनल फिल्म फैस्टिवल में भी ये फिल्म प्रदर्शति की गई थी। वहीं बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में तो 'दिल से' काफी चर्चाओं में रही थी। वहां इस फिल्म को नेटपाक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

टाइमलैस

'दिल से' की पॉलिटिकल मैसेजिंग को अगर छोड़ दें तो इस फिल्म में कई ऐसे एलिमेंट्स हैं जो इसे टाइमलैस मूवी बनाते हैं। जैसे इस फिल्म की कहानी, फिल्म का साउंडट्रैक, एक्टर्स का काम, फिल्म का लुक, फील, फिल्म में दिखाए गए इमोशन्स, रोमांस, और गीतों का पिक्चराइजेशन। 

ये इस फिल्म के कुछ वो पॉइन्ट्स हैं जो इसे हमेशा फ्रैश बनाकर रखते हैं। इसलिए अगर आपने अभी तक 'दिल से' फिल्म नहीं देखी है तो आपको अब इन सभी पॉइन्ट्स को ध्यान में रखकर ये फिल्म एक बार तो ज़रूर देखनी चाहिए। और अगर देख चुके हैं तो फिर से देखनी चाहिए।

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