Suhaag 1979 Movie | 11 बहुत ही रोचक व Unknown Facts

16 नवंबर 1979 के दिन अमिताभ बच्चन साहब और शशि कपूर की फिल्म सुहाग रिलीज़ हुई थी। मनमोहन देसाई द्वारा निर्देशित सुहाग फिल्म में हर वो मसाला था जो उस दौर में फिल्म के शौकीनों को पसंद आता था।

फिर चाहे वो एक्शन हो, रोमांस हो, इमोशन्स हों या कॉमेडी हो। इसिलिए ये फिल्म दर्शकों को इतना पसंद आई थी। जहां अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की कॉमिक और एक्शन टाइमिंग ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

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Unknown Facts about Suhaag 1979 Movie - Photo: Social Media

तो वहीं अमजद खान ने भी अपनी विलेनी से इस फिल्म को रोमांचक बना दिया। कादर खान के लिखे डायलॉग्स सुहाग फिल्म की यूएसपी बने। और आनंद बक्शी जी के लिखे गीतों को लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने अपनी धुनों से सजाकर फिल्म में चार चांद लगा दिए।

अमिताभ बच्चन व शशि कपूर के अलावा फिल्म की प्रमुख स्टारकास्ट थी निरूपा रॉय, रेखा, परवीन बाबी, अमजद खान, रंजीत, कादर खान, जीवन, जगदीश राज, कृष्ण धवन, मूलचंद और वत्सला देशमुख। चलिए, इस फिल्म से जुड़ी कुछ रोचक बातें जानते हैं।

पहली

साल 1979 की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी सुहाग। एक करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने पांच करोड़ रुपए कमाए थे। उस साल की दूसरी सबसे सफल फिल्म थी जानी दुश्मन जिसने साढ़े चार करोड़ रुपए की कमाई की थी। और तीसरे पायदान पर रही थी ऋषि कपूर की सरगम जो चार करोड़ रुपए कमाने में सफल रही थी।

दूसरी

सुहाग फिल्म की शूटिंग जब चल रही थी तब देश में इंदिरा गांधी सरकार ने इमरजेंसी लगाई हुई थी। ऐसे में इस फिल्म के कई दृश्यों को विदेश में शूट करना पड़ा था। क्योंकि भारत में उन दृश्यों को फिल्माने की परमिशन नहीं दी गई थी।

फिल्म में एक दृश्य है जिसमें अमिताभ बच्चन और शशि कपूर हैलिकॉप्टर पर लटके दिखाई देते हैं। वो दृश्य मनमोहन देसाई को सिंगापुर में शूट करना पड़ा था। ऐसे ही फिल्म के और कुछ दृश्य लंदन में पिक्चराइज़ किए गए थे। फिल्म का मशहूर गीत "तेरी रब बने बना दी जोड़ी" लंदन के रिचमंड पार्क में शूट हुआ था।

तीसरी

सुहाग में इक्का-दुक्का दृश्य ऐसे हैं जिनमें सुनाई दे रहा बैकग्राउंड म्यूज़िक बाद में अन्य फिल्मों में भी इस्तेमाल किया गया। जैसे परवीन बाबी और निरूपा राय के मिलने के दृश्य में जो बैकग्राउंड म्यूज़िक सुनाई देता है उसे बाद में गंगा जमुना सरस्वती में फिल्माया गया था।

ऐसे ही अमिताभ सुहाग में जब भी अपना वो मशहूर कोल्हापुरी चप्पल वाला डायलॉग बोलते हैं तो उसके बैकग्राउंड में सुनाई देने वाला म्यूज़िक फिल्म देश प्रेमी के भी उस दृश्य में सुनाई देता है जिसमें गुंडे हेमा मालिनी का अपहरण करने की कोशिश करते हैं और अमिताभ बच्चन से उनका सामना होता है।

चौथी

सुहाग फिल्म की शूटिंग 1977 में ही शुरू हो गई थी। जबकी इसका मुहुर्त 12 जनवरी 1976 को ही हो चुका था। लेकिन देश में लगी इमरजेंसी के चलते इस फिल्म को कंप्लीट करने में काफी समय लग गया। इसी बीच प्रकाश मेहरा की फिल्म मुकद्दर का सिकंदर 1978 में रिलीज़ हुई।

उस फिल्म में भी रेखा व अमिताभ बच्चन और अमजद खान थे। मनमोहन देसाई को जब पता चला कि मुकद्दर का सिकंदर फिल्म में भी रेखा एक तवायफ का कैरेक्टर प्ले कर रही हैं तो उन्हें बड़ा गुस्सा आया।

मनमोहन देसाई को लगा कि प्रकाश मेहरा ने किसी तरह रेखा से सुहाग फिल्म के उनके कैरेक्टर की जानकारी निकलवाकर उसे मुकद्दर का सिकंदर फिल्म में पहले इस्तेमाल कर लिया। मनमोहन देसाई ने तब कुछ इंटरव्यूज़ में प्रकाश मेहरा की बुराई कर दी थी।

बताया जाता है कि तब रेखा से भी उनका काफी विवाद हुआ था। जबकी प्रकाश मेहरा का कहना था कि उन्होंने अपनी फिल्म में रेखा का जो कैरेक्टर डेवलप किया था वो पूरी तरह से उनके खुद के दिमाग की उपज थी। रेखा से उन्होंने मनमोहन देसाई की फिल्म के बारे में कुछ भी पूछताछ नहीं की थी।

पांचवी

जब मनमोहन देसाई ने एक्ट्रेस परवीन बाबी को पहली दफा सुहाग फिल्म ऑफर की थी तो परवीन ने उनका ऑफर ये कहकर ठुकरा दिया था कि वो कबीर बेदी के साथ यूरोप जा रही हैं। और वो नहीं जानती कि उनकी वापसी कब तक होगी।

लेकिन मनमोहन देसाई तय कर चुके थे कि परवीन बाबी को ही वो सुहाग के उस रोल में कास्ट करेगे। उन्होंने परवीन से कहा कि मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा। तुम्हारे सीन तभी शूट किए जाएंगे जब तुम वापस आ जाओगी।

दरअसल, उस रोल के लिए किसी ऐसी एक्ट्रेस की ज़रूरत थी जो वेस्टर्नाइज़्ड दिख सके। परवीन बाबी की पर्सनैलिटी ऐसी ही थी। लेकिन जब परवीन बाबी यूरोप चली गई तो मनमोहन देसाई को भी एक वक्त पर लगने लगा कि शायद परवीन जल्दी से ना लौटकर आए।

ऐसे में उनके ज़ेहन में सिमी गरेवाल का चेहरा आया। उन्हें लगा कि वो रोल परवीन के बाद केवल सिमी गरेवाल ही जस्टीफाई कर सकती हैं। उन्होंने सिमी गरेवाल से बात की। सिमी भी उस रोल में दिलचस्पी ले रही थी।

तभी कोई छह महीने बाद परवीन बाबी यूरोप से वापस भारत लौटी। हालांकि उस वक्त तक खुद परवीन को उम्मीद नहीं थी कि देसाई ने अब तक किसी और को वो रोल नहीं दे दिया होगा। लेकिन वो फिर भी ऐसे ही मनमोहन देसाई से मिली और उस रोल के बारे में पूछा।

मनमोहन देसाई ने उन्हें बताया कि वो रोल उन्होंने किसी और को नहीं दिया। और फिर मनमोहन देसाई ने परवीन बाबी को साइन कर लिया। इस तरह सिमी गरेवाल के हाथ से सुहाग फिल्म आते-आते निकल गई।

छठी

परवीन बाबी सुहाग में रेखा की छोटी बहन बनी हैं। लेकिन वास्तव में परवीन बाबी रेखा से उम्र में कोई छह महीने बड़ी थी। इस फिल्म में रेखा एक मुजरे वाली थी। लेकिन वो अपनी छोटी बहन परवीन बाबी से मुजरे के अपने काम को छिपाकर रखती है।

1978 में आई कर्मयोगी फिल्म में भी रेखा का कैरेक्टर कुछ-कुछ ऐसा ही था। कर्मयोगी में रेखा एक क्लब डांसर होती हैं। लेकिन वो अपनी छोटी बहन से अपने काम को छुपाकर रखती हैं। कर्मयोगी में रेखा की छोटी बहन का किरदार एक्ट्रेस रीना रॉय ने निभाया था।

सातवीं

सुहाग में अमिताभ और शशि कपूर के पिता का किरदार निभाने वाले एक्टर अमजद खान उम्र में अमिताभ बच्चन से मात्र 2 साल बड़े थे। जबकी शशि कपूर से वो दो साल छोटे थे।

फिल्म में अमजद की पत्नी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस निरूपा रॉय उम्र में उनसे नौ साल बड़ी थी। जबकी अपने बेटे बने शशि कपूर से निरूपा रॉय वास्तव में उम्र में मात्र सात साल बड़ी थी।

आठवीं

ये बात भी जानने लायक है कि मनमोहन देसाई ने इस फिल्म का नाम सुहाग तो रख दिया था। लेकिन वो सुहाग नाम से खुश नहीं थे। कुछ दिनों बाद उन्होंने प्लानिंग की कि वो इस फिल्म का नाम सुहाग से बदलकर मां कसम रखेंगे।

मां कसम नाम उन्हें एकदम सही लग रहा था। लेकिन तभी उन्हें खबर मिली की इस नाम से तो एक फिल्म पहले ही बन रही है जिसमें विनोद मेहरा हीरो हैं। आखिरकार मनमोहन देसाई को इस फिल्म का नाम सुहाग ही रखना पड़ा।

नौंवी

सुहाग जब रिलीज़ हो गई थी तब इंग्लैंड में भी इस फिल्म के कुछ शोज़ रखे गए थे। वहां के एक थिएटर में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की एक अनअनाउंस्ड विज़िट प्लान की गई। प्लान था कि अमिताभ बच्चन व शशि कपूर फिल्म के इंटरवल में दर्शकों के सामने आकर उन्हें सरप्राइज़ देंगे और उनसे कुछ बात करेंगे।

ऐसा किया भी गया। अमिताभ बच्चन और शशि कपूर एक थिएटर में गए जहां सुहाग दिखाई जा रही थी। लेकिन उन्हें देखकर पब्लिक ने जैसे रिएक्ट किया उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।

लोग अमिताभ बच्चन व शशि कपूर को देखकर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगे। इन दोनों के पास आने की कोशिश करने लगे। चूंकि इन्हें इंग्लैंड में पब्लिक से इस तरह के रिएक्शन की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी तो ये दोनों सिक्योरिटी लेकर भी नहीं गए थे।

इसलिए उस दिन बड़ी मुश्किल से अमिताभ बच्चन व शशि कपूर को उस थिएटर से बाहर निकाला गया। और उसी दिन अमिताभ को रियलाइज़ हुआ कि अब विदेशों में भी उनकी फैन फॉलोइंग कितनी ज़्यादा हो गई है।

दसवीं

सुहाग में रंजीत ने भी एक निगेटिव कैरेक्टर प्ले किया है। और रंजीत के किरदार का नाम है गोपाल। ये रंजीत का असली नाम भी है। रंजीत उनका फिल्मी नाम है। उनका असली नाम गोपाल बेदी ही है।

सुहाग में रंजीत पायरेट्स की तरह एक आंख पर आई-पैच पहने दिखाई देते हैं। सुहाग से कोई दो साल पहले, यानि 1977 में रिलीज़ हुई मस्तान दादा नाम की फिल्म में भी रंजीत ने ऐसा ही आई-पैच पहना था।

11वीं

सुहाग में अमजद खान एक अलग तरह के अंदाज़ में बोलते दिखाई देते हैं। उनकी आवाज़ ज़रा हस्की सुनाई देती है। कुछ-कुछ ऐसे ही अमजद खान परवरिश व मुकद्दर का सिंकदर फिल्म में भी बोलते दिखाई दिए थे।

कहा जाता है कि क्योंकि शोले फिल्म में कुछ लोगों ने अमजद खान की आवाज़ की काफी आलोचना की थी तो अमजद खान इसी वजह से अपनी आवाज़ को हल्का सा मॉड्यूलेट करके कुछ फिल्मों में अपने डायलॉग्स बोलते देखे गए थे। लेकिन सिर्फ कुछ में ही। सभी में नहीं। 

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