Swami Rajneesh | बदकिस्मत Actress Vimi के बेटे कही कहानी जो Osho का शिष्य है
Swami Rajneesh के बारे में जानने से पहले बहुत थोड़ा सा अभिनेत्री विमी के बारे में जान लीजिए। पहली ही फिल्म से सफलता के शिखर पर पहुंची बेहद खूबसूरत अभिनेत्री विमी का अंत बेहद बुरा हुआ था।
ज़िंदगी के आखिरी समय में विमी को दुनिया की तरफ से वो रुसवाई मिली, जिसकी कल्पना एक आम इंसान भी नहीं करना चाहेगा।
विमी की मौत एक सरकारी अस्पताल के जनरल वार्ड में हुई थी और उनकी लाश को एक ठेले पर लादकर शमशान घाट तक ले जाया गया था।
विमी की कहानी जिसको भी पता चली, वो सिनेमा की चमक-धमक वाली ज़िंदगी की ये वाली हकीकत देखकर सन्न रह गया था। उसी कहानी में हमने बताया था कि विमी के दो बच्चे थे। एक बेटा और एक बेटी।
हमारे कई पाठकों ने मांग की थी कि विमी के बच्चों के बारे में जानकारी दी जाए। पाठकों की मांग पर हमने विमी के बच्चों के बारे में जानकारी खोजनी शुरू कर दी।
अपनी खोज में हम आधे कामयाब रहे और आधे नाकामयाब रहे। कई कोशिशों के बाद भी हम ये नहीं पता लगा पाए कि विमी की बेटी का नाम क्या था और उनका क्या हुआ।

Ozen Rajneesh Agarwal Son of Late Bollywood Actress Vimi - Photo: Social Media
हालांकि Vimi के Son Swami Rajneesh के बारे में ज़रूर हमने कुछ जानकारी हासिल की है। और अब Swami Rajneesh के बारे में मिली जानकारी को हम अपने पाठकों संग भी शेयर कर रहे हैं।
इस कंपनी के मालिक हैं विमी की ससुराल वाले
विमी ने कलकत्ता के बड़े बिजनेसमैन परिवार के लाडले शिवराज अग्रवाल से लव मैरिज की थी। सन 1961 में विमी एक बेटे की मां बनी थी। विमी और उनकी ससुराल वालों ने बेटे का नाम रखा रजनीश अग्रवाल।
विमी की ससुराल कलकत्ता का एक बड़ा और नामी बिजनेस परिवार था। कलकत्ता की जीडीपीए स्टील कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी विमी के पति शिवराज अग्रवाल के पिता ने ही स्थापित की थी।
हाई सोसायटी में पले-बढ़े Swami Rajneesh
एक अमीर और नामी घराने में पैदा होने के चलते बचपन से ही रजनीश अग्रवाल हाई सोसायटी में पले बढ़े। इनके परिवार के संबंध देश के कई दूसरे अमीर बिजनेस घरानों से अच्छे थे। साथ ही देश के बड़े नेताओं संग भी इनके परिवार की उठ-बैठ थी।
वहीं मां विमी के ज़िंदा रहने तक फिल्म इंडस्ट्री में भी कई बड़े नामों से इनकी जान-पहचान हो चुकी थी। इनकी शुरुआती पढ़ाई दार्जिलिंग के मशहूर सेंट पॉल्स स्कूल से हुई।
ऐसी भी रही है Swami Rajneesh की ज़िंदगी
आगे चलकर रजनीश ने आर्किटेक्ट की पढ़ाई की और फिर झुनझुनवाला ग्रुप ऑफ कंपनीज़ में बतौर डिज़ायनर काम करने लगे। इस दौरान इन्हें बेहद शानदार सैलरी मिली। साल 1993 में रजनीश ने झुंनझुनवाला ग्रुप ऑफ कंपनीज़ को जॉइन किया था।
झुनझुनवाला ग्रुप की तरफ से इन्हें 3 लाख अमेरिकी डॉलर्स सालाना बतौर सैलरी मिलते थे। अपनी इस नौकरी के दौरान रजनीश को दुनिया के कई हिस्सों में घूमने का मौका भी मिला। रजनीश को कई अवॉर्ड्स से भी सम्मानित किया गया।
जब ओशो के संपर्क में आए स्वामी रजनीश
लेकिन इसी दौरान रजनीश महान अध्यात्मिक गुरू ओशो के संपर्क में आए और उनका मन दुनियादारी से हटकर अध्यात्म की तरफ जाने लगा। रजनीश ने दुनियादारी छोड़कर पूरी तरह से अध्यात्म को अपना लिया और ओशो के पूना आश्रम चले गए।
पूना आश्रम में रजनीश महान गुरू ओशो के काफी करीब आ गए। खुद ओशो ने रजनीश का नाम स्वामी रजनीश कर दिया। इस दौरान दुनियाभर से आने वाले लाखों श्रद्धालू भी उनको जानने-पहचानने लगे।
शुरू किया विश्वभ्रमण
ओशो जब दुनिया से विदा हुए तो स्वामी रजनीश हिमालय की वादियों में एकांतवास में चले गए। स्वामी रजनीश ने लगभग 9 सालों तक हिमालय की वादियों की खामोशी में एकांतवास किया।
इस दौरान पूना आश्रम में इनके संपर्क में आए कुछ विदेशी श्रद्धालुओं ने इनसे कहा कि आप दुनियाभर में घूमकर ओशो के विचारों का प्रचार क्यों नहीं करते। स्वामी रजनीश ने उनकी बात मान ली और 2007 में इन्होंने विश्वभ्रमण शुरू किया।
इन्होंने दुनिया के 80 शहरों में मेडिटेशन और सन्यास कैंप्स लगाए। अध्यात्म की दुनिया में आज स्वामी रजनीश एक बड़ा नाम बन चुके हैं। विदेशों में इनकी बेहद रिस्पेक्ट है।
इनके ध्यान केंद्रों की सबसे खास बात है कि ये पूरी तरह से निशुल्क होते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं से किसी तरह की कोई फीस नहीं ली जाती है। स्वामी रजनीश की लोक्रियता बढ़ने का ये एक प्रमुख कारण है।
ओशो के खिलाफ हुए स्वामी रजनीश
यहां एक बात बताना बेहद ज़रूरी है कि अंतिम समय में स्वामी रजनीश के ओशो संग भी मतभेद हो गए थे। स्वामी रजनीश ने ओशो की बेतहाशा संपत्ति पर सवाल खड़े किए थे।
उन्होंने ओशो पर ये सवाल भी खड़ा किया था कि अपने आश्रम में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं से मोटी रकम फीस के तौर पर वसूलते हैं और उसका कोई हिसाब-किताब नहीं होता।
पहले गोवा में बनाने वाले थे आश्रम
स्वामी रजनीश की लोकप्रियता जब तेज़ी से बढ़ी तो इनके कई शिष्यों इनसे आश्रम खोलने की विनती की। कईयों ने इन्हें गोवा में आश्रम खोलने का सुझाव दिया।
स्वामी रजनीश की लोकप्रियता का अंदाज़ा आप ऐसे लगा सकते हैं कि इनके शिष्यों ने गोवा में इनके आश्रम के लिए ज़मीन खरीदने हेतू चंदा जमा करना शुरू कर दिया था।
स्वामी रजनीश भी श्रद्धालुओं की खातिर साल 2010 में भारत वापस लौटे और इन्होंने साउथ गोवा के क्वेपेम इलाके में 50 एकड़ ज़मीन खरीद ली।
अपने इस आश्रम को स्वामी रजनीश ईको विलेज के तौर पर डेवलप करना चाहते थे। इसका नाम उन्होंने रखा था मिस्टिक रोज़ विज़न। लेकिन सरकार से परमिशन मिलने में इन्हें बेहद समय लग रहा था।
स्वामी रजनीश चाहते थे कि गोवा सरकार इनके आश्रम को 2021 डेवलपमेंट प्लान के तहत मंजूरी दे। लेकिन अफसरशाही में मौजूद भ्रष्टाचार के चलते इन्हें परमिशन नहीं मिली और आखिरकार इन्होंने एक बार फिर भारत छोड़ दिया और ये मैक्सिको चले गए।
मैक्सिको में बनाया ओज़ेन स्वामी रजनीश
2012 में मैक्सिको सरकार की तरफ से इन्हें प्लाया डेल कारमने इलाके में आश्रम निर्माण की मंजूरी मिल गई। दो साल के भीतर ही इनका मैक्सिको वाला आश्रम बनकर तैयार हो गया।
इस आश्रम को नाम दिया गया है ओज़ेन स्वामी रजनीश। 50 एकड़ ज़मीन पर फैला ये आश्रम आज अध्यात्म की खोज करने वाले दुनियाभर के श्रद्धालुओं की पसंदीदा जगह है।
इस आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं को सभी तरह की सुविधाएं निशुल्क दी जाती हैं। ये आश्रम एक एनजीओ की तरह से काम करता है।
शायद खुश होंगी विमी
आज स्वामी रजनीश मैक्सिको के अपने इसी आश्रम में रहते हैं। अपनी पुरानी ज़िंदगी से उनका शायद ही कोई वास्ता हो।
लेकिन आसमान से विमी जब धरती की तरफ अपने बेटे को देखती होंगी तो उनको सुकून मिलता होगा कि कम से कम उनका बेटा उनकी तरह अकेलेपन और दुनिया की रुसवाई का शिकार नहीं है।
दुनियाभर के लाखों लोग उनके बेटे को चाहते हैं। उनसे प्यार करते हैं और उनका सानिध्य पाने के लिए उत्सुक रहते हैं।
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