The Mummy Returns 2001 | द ममी रिटर्न्स फ़िल्म बनने की 15 अनसुनी और रोचक कहानियां
फ़िल्म क्या है? एक कहानी। और एक कहानी को फ़िल्म की शक्ल देने के दौरान भी कई कहानियां बन जाती हैं। जैसे इस फ़िल्म को ही ले लीजिए। ये है द ममी रिटर्न्स। ये फ़िल्म रिलीज़ हुई थी 4 मई 2001 को। लेकिन तब ये ऑस्ट्रेलिया में रिलीज़ हुई थी। भारत में इसे रिलीज़ किया गया था 13 जुलाई 2001 के दिन।
इस फ़िल्म का बजट था 98 मिलियन डॉलर्स। सन 2001 में एक अमेरिकी डॉलर 47.19 भारतीय रुपयों के बराबर था। यानि उस वक्त द ममी रिटर्न फ़िल्म को बनाने में 462.46 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। बात अगर इस फ़िल्म की कमाई की करें तो इसने 435 मिलियन डॉलर्स की कमाई की थी। भारतीय रुपयों में सन 2001 में ये रक़म हुई थी लगभग 19 अरब 63 करोड़ रुपए।
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| The Mummy Returns 2001 Hindi Trivia - Photo: Social Media |
चलिए, द ममी रिटर्न्स फ़िल्म की मेकिंग से जुड़ी 15 रोचक कहानियां जानते हैं। अगर आपको ये कहानियां पसंद आएं तो आप मेरठ मंथन को फॉलो ज़रूर कीजिएगा। बॉलीवुड-हॉलीवुड फिल्मों व फ़िल्म कलाकारों की ऐसी कहानियां आपको यहां मिलती रहेंगी पढ़ने के लिए।
द रॉक की फिल्मी शुरुआत
यह फिल्म रेसलिंग लेजेंड ड्वेन 'द रॉक' जॉनसन की पहली बड़ी हॉलीवुड फिल्म थी। हालांकि वे फिल्म में बहुत कम समय के लिए दिखते हैं, लेकिन 'स्कॉर्पियन किंग' के रूप में उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि उनके किरदार पर आधारित एक अलग स्पिन-ऑफ फिल्म बनाई गई। शूटिंग के दौरान वे अपने खाने-पीने को लेकर इतने सख्त थे कि वे केवल अपना बना हुआ खाना ही खाते थे।
ब्रेंडन फ्रेजर की चोटें
फिल्म के एक्शन सीन्स को असली दिखाने के चक्कर में मुख्य अभिनेता ब्रेंडन फ्रेजर बुरी तरह चोटिल हो गए थे। उनके घुटने की डिस्क हट गई थी, पसलियां टूट गई थीं और उनकी पीठ में भी काफी दर्द रहने लगा था। फ्रेजर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इस फिल्म की शूटिंग ने उनके शरीर को काफी हद तक तोड़ दिया था, जिसे ठीक होने में सालों लगे।
शॉन कॉनरी को मिला था ऑफर
क्या आप जानते हैं कि फिल्म में रिक ओ'कोनेल (ब्रेंडन फ्रेजर) के पिता की भूमिका के लिए महान अभिनेता शॉन कॉनरी को चुना गया था? निर्देशक स्टीफन सोमर्स चाहते थे कि वह इस फिल्म का हिस्सा बनें, लेकिन कॉनरी ने उस समय 'लीग ऑफ एक्स्ट्राऑर्डिनरी जेंटलमैन' के लिए इसे मना कर दिया। बाद में फिल्म के तीसरे भाग में रिक के पिता का जिक्र आया।
अदेल एदेल की कड़ी मेहनत
फिल्म में 'अंक-सु-नामून' का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस पेट्रीसिया वेलास्क्वेज़ और 'एवलिन' बनीं राचेल वाइज़ के बीच जो शानदार फाइट सीन है, उसके लिए उन्होंने 5 महीने तक कड़ी ट्रेनिंग ली थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सीन में किसी स्टंट डबल का इस्तेमाल नहीं किया गया; दोनों अभिनेत्रियों ने खुद ही वह पूरी फाइट की थी।
स्कॉर्पियन किंग का खराब CGI
फिल्म के क्लाइमेक्स में जब स्कॉर्पियन किंग आधा इंसान और आधा बिच्छू बनकर सामने आता है, तो उसका विजुअल इफेक्ट्स (CGI) काफी अजीब लगता है। आज भी इसे हॉलीवुड के सबसे खराब CGI में गिना जाता है। इसका कारण यह था कि विजुअल इफेक्ट्स टीम के पास समय बहुत कम था और ड्वेन जॉनसन की बॉडी को डिजिटल रूप से सही से रेंडर नहीं किया जा सका था।
रेगिस्तान की भीषण गर्मी
फिल्म की शूटिंग मोरक्को के रेगिस्तान में हुई थी जहाँ तापमान 50°C से ऊपर चला जाता था। गर्मी इतनी अधिक थी कि प्रोडक्शन टीम को हर दो घंटे में क्रू और एक्टर्स को एक खास इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक पिलानी पड़ती थी ताकि वे डिहाइड्रेशन का शिकार न हों। कई बार गर्मी की वजह से शूटिंग बीच में ही रोकनी पड़ती थी।
बिच्छू और मकड़ियों का डर
फिल्म के एक सीन में छोटे-छोटे स्कॉर्पियन दिखाए गए हैं। शूटिंग के दौरान असली बिच्छू और कीड़े-मकोड़ों का भी इस्तेमाल किया गया था। अभिनेता फ्रेडी बोथ (अलेक्स ओ'कोनेल) ने बताया था कि उन्हें कई बार असली बिच्छुओं के साथ सीन शूट करने में बहुत डर लगता था, लेकिन टीम ने सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा था।
लंदन ब्रिज का ट्रैफिक
फिल्म के उस सीन को याद करें जहाँ डबल-डेकर बस को ममीज पीछा करती हैं? उस सीन की शूटिंग लंदन के मशहूर 'टावर ब्रिज' पर हुई थी। उस समय ट्रैफिक को केवल 20 मिनट के लिए रोकने की अनुमति मिली थी। टीम को इतने कम समय में ही वो आइकॉनिक शॉट लेना पड़ा, जो वाकई में एक बड़ी चुनौती थी।
ब्रेंडन फ्रेजर का 'रियल' स्टंट
फिल्म के एक सीन में ब्रेंडन फ्रेजर को करीब 20 किलो की सोने की मूर्ति उठाकर भागना था। निर्देशक ने उन्हें असली भारी मूर्ति थमा दी थी ताकि उनके चेहरे पर असली मेहनत और पसीना दिखे। फ्रेजर उस भारी भरकम प्रोप के साथ घंटों तक दौड़ते रहे, जिससे उनकी मांसपेशियों में खिंचाव आ गया था।
अरबी भाषा का इस्तेमाल
फिल्म में 'हाई प्रीस्ट इम्होटेप' और अन्य किरदारों द्वारा बोली जाने वाली भाषा प्राचीन मिस्र की भाषा के करीब दिखाने की कोशिश की गई थी। इसके लिए एक भाषा विशेषज्ञ को काम पर रखा गया था ताकि मंत्रों और संवादों का उच्चारण सही और प्रभावशाली लगे, जिससे फिल्म को एक ऐतिहासिक गहराई मिले।
द रॉक की बीमारी
शूटिंग के दौरान ड्वेन जॉनसन को फूड पॉइजनिंग और सनस्ट्रोक (लू लगना) हो गया था। उनकी हालत इतनी खराब थी कि वे काफी कमजोर हो गए थे, लेकिन फिर भी उन्होंने अपने हिस्से की शूटिंग पूरी की। उन्होंने बाद में कहा था कि यह उनके करियर का सबसे कठिन शूट था क्योंकि वे पहली बार इतने बड़े सेट पर थे।
म्यूजियम के सीन की सच्चाई
फिल्म की शुरुआत में ब्रिटिश म्यूजियम का जो हिस्सा दिखाया गया है, वह दरअसल एक सेट था। असली म्यूजियम में इतने बड़े एक्शन सीन और तोड़-फोड़ की अनुमति नहीं मिल सकती थी, इसलिए लंदन के ही एक स्टूडियो में म्यूजियम का हूबहू ढांचा खड़ा किया गया था जो देखने में बिल्कुल असली लगता है।
ओडिड फेहर का टैटू
फिल्म में अर्देथ बे (मेजाई लीडर) के चेहरे पर जो टैटू दिखते हैं, वे असली नहीं थे। ओडिड फेहर को हर दिन शूटिंग से पहले घंटों मेकअप चेयर पर बैठना पड़ता था ताकि वे टैटू उनके चेहरे पर बनाए जा सकें। कई बार पसीने की वजह से टैटू खराब हो जाते थे और उन्हें फिर से बनाना पड़ता था।
ममी की 'चीख'
इम्होटेप की वो डरावनी चीख जो पूरी फिल्म में सुनाई देती है, वह केवल एक इंसान की आवाज नहीं थी। साउंड डिजाइनर्स ने उस आवाज को ज्यादा डरावना बनाने के लिए उसमें कई जानवरों (जैसे चीते और हाथी) की आवाजों को मिक्स किया था, ताकि दर्शकों के मन में दहशत पैदा हो सके।
बॉक्स ऑफिस धमाका
यह फिल्म 2001 की सबसे बड़ी हिट्स में से एक थी। इसने अपने ओपनिंग वीकेंड पर ही रिकॉर्ड तोड़ कमाई की थी। इसकी सफलता ने साबित कर दिया था कि 'द ममी' फ्रैंचाइजी के लिए लोगों में कितना क्रेज है। इसी फिल्म की वजह से ही आगे चलकर 'द ममी: टॉम्ब ऑफ द ड्रैगन एम्परर' जैसी फिल्म बन पाईं।
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