Maadhavi | साउथ से बॉलीवुड तक खूब नाम कमाया। लेकिन एक फिल्म ने सब बर्बाद कर दिया। पढ़िए Actress माधवी की Biography
रजनीकांत इन्हें अपने लिए भाग्यशाली मानते थे। दूसरी श्रीदेवी कहा जाने लगा था इन्हें। लेकिन एक दिन अचानक इन्होंने फ़िल्मों में काम करना छोड़ दिया। और मीडिया ने भी इनके बारे में लिखना बंद कर दिया। नाम है इनका माधवी। 1980 के दशक में आई कई फिल्मों में आपने इन्हें देखा होगा। उस वक्त के कई बड़े हीरोज़ की ये हीरोइन बनी थी।
राजेश खन्ना की सुपरहिट फिल्म स्वर्ग में माधवी ही उनकी पत्नी के किरदार में दिखी थी। हिंदी के अलावा साउथ की फिल्मों में भी माधवी ने खूब काम किया। साउथ की फिल्मों से ही माधवी का करियर भी शुरू हुआ था। और रजनीकांत संग इनकी जोड़ी बड़ी हिट हुई। चलिए आज माधवी जी की कहानी भी जानते हैं।

Biography of veteran actress Maadhavi - Photo: Social Media
14 सितंबर 1962 को हैदराबाद में माधवी का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम गोविंदस्वामी और माता का नाम शशिरेखा है। माधवी का रियल नेम कनक विजयलक्ष्मी है। माधवी की एक बहन और एक भाई भी हैं। छोटी उम्र से ही माधवी ने भरतनाट्यम और लोकनृत्य सीखना शुरू कर दिया था।
माधवी की स्कूलिंग हैदराबाद के स्टेनली गर्ल्स हाई स्कूल से हुई थी। स्कूल में होने वाले फंक्शन्स में माधवी नृत्य प्रस्तुतियां दिया करती थी। स्कूल के अलावा अपने क्षेत्र में होने वाले विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी माधवी नृत्य करती थी। और लोगों द्वारा माधवी को खूब सराहा जाता था।
अपने नृत्य से माधवी ने छोटी उम्र में ही काफी ख्याति पा ली थी। फिर एक दिन माधवी को उनकी पहली फिल्म भी मिल गई। वो फिल्म थी "थुरुपू पदमारा" जिसे दसारी नारायण राव ने डायरेक्ट किया था। इस रोमैंटिक ड्रामा फिल्म में माधवी ने कल्याणी का किरदार निभाया था। 23 अक्टूबर 1976 को रिलीज़ हुई ये फिल्म हिट रही थी।
इस तरह माधवी का फिल्मी करियर ज़ोरों-शोरों से शुरू हुआ। माधवी को और भी कई फिल्में मिली। और देखते ही देखते माधवी साउथ फिल्म इंडस्ट्री का नामी चेहरा बन गई। माधवी ने तमिल, तेलुगू मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में खूब काम किया।
साल 1978 में "मारो चरित्र" नाम की एक तेलुगू फिल्म में माधवी सपोर्टिंग भूमिका में नज़र आई। कमल हासन उस फिल्म के हीरो थे। फिल्म सक्सेसफुल रही। फिल्म को के.बालाचंदर ने डायरेक्ट किया था। के. बालाचंदर ने फिल्म को हिंदी में रीमेक करने का फैसला किया। 1981 में ये फिल्म "एक दूजे के लिए" नाम से हिंदी में आई।
हिंदी फिल्म भी सुपरहिट रही। और हिंदी वर्ज़न में भी कमल हासन ही हीरो थे। इस तरह कमल हासन और माधवी का हिंदी फिल्म करियर एक साथ शुरू हुआ। "एक-दूजे के लिए" फिल्म की हीरोइन रति अग्निहोत्री थी। माधवी ने इस फिल्म में वही किरदार निभाया जो उन्होंने इसके ऑरिजिनल तेलुगू वर्ज़न "मारो चरित्र" में निभाया था।
उस दौर में साउथ के कई एक्टर्स, खासतौर पर हीरोइनें बॉलीवुड फिल्मों में आ रही थी। साउथ की फिल्मों के हिंदी रीमेक्स भी उस वक्त खूब बन रहे थे। उसी दौर में जया प्रदा और श्रीदेवी जैसी अदाकाराएं भी साउथ से हिंदी फिल्मों की तरफ आई थी
"एक दूजे के लिए" की सफलता ने माधवी को टेंशन में ला दिया। जबकी उन्हें तो खुश होना चाहिए। लेकिन उनकी टेंशन की वजह जायज़ थी। माधवी भी हीरोइन बनना चाहती थी। मगर दो सफल फिल्मों में एक ही भूमिका निभाने की वजह से उन्हें फिक्र होने लगी कि कहीं वो टाइपकास्ट ना हो जाएं।
ये एक ऐसा डर है जो एक्टर्स के मन में हमेशा से रहा है। हालांकि माधवी को बहुत दिनों तक टाइपकास्ट होने के इस डर का सामना नहीं करना पड़ा। कमल हासन और रजनीकांत ने माधवी को कई फिल्मों में अपने साथ लीड हीरोइन के तौर पर साइन कराया। और माधवी ने साउथ की कई बहुत सफल फिल्मों में हीरोइन के तौर पर काम किया।
माधवी अपने बोल्ड रूप के लिए भी मशहूर हुई। कुछ फिल्मों में इन्होंने बिकिनी पहनी थी। जो उस वक्त बड़ी बात होती थी। माधवी जब हीरोइन बनी तो रजनीकांत के अपोज़िट उन्होंने खूब काम किया। रजनीकांत माधवी को अपना लकी मैस्कट मानने लगे। माधवी की दूसरी हिंदी फिल्म थी अंधा कानून। और ये रजनीकांत की पहली हिंदी फिल्म भी थी।
अंधा कानून में रजनीकांत के कहने पर ही माधवी के लिए एक स्पेशल रोल लिखा गया था। उस फिल्म में माधवी अमिताभ बच्चन की पत्नी ज़किया खान के छोटे से किरदार में दिखी थी।
इस तरह माधवी का करियर हिंदी फिल्मों में भी चल निकला। उन्होंने क़ैदी, गिरफ्तार, लोहा, इंसाफ कौन करेगा, प्यार का मंदिर, पराया घर, मर मिटेंगे, लश्कर, नफ़रत की आंधी, स्वर्ग, अग्नीपथ, सरफिरा जैसी फिल्मों में काम किया। 1994 में आई "खुदाई" माधवी की आखिरी हिंदी फिल्म थी। उस वक्त के हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लगभग हर बड़े स्टार के साथ माधवी ने स्क्रीन शेयर की थी।
श्रीदेवी और जयाप्रदा जैसी साउथ की एक्ट्रेसेज़ को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में मिली कामयाबी से माधवी बहुत प्रभावित थी। इन दोनों एक्ट्रेसेज़ का करियर माधवी के लगभग साथ-साथ ही शुरू हुआ था। ये दोनों जब हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बहुत कामयाब हो गई तो वही कामयाबी पाने का ख्वाब माधवी भी देखने लगी।
लेकिन इस ख्वाब को पूरा करने के चक्कर में उन्होंने कुछ बेकार फिल्में साइन कर ली। ऐसी ही एक फिल्म थी 1987 में आई "कलयुग और रामायाण" जिसे बाबूभाई मिस्त्री ने डायरेक्ट किया था और मनोज कुमार ने प्रोड्यूस किया था। मनोज कुमार ने इस फिल्म में अभिनय भी किया था।
मनोज कुमार के भाई राजीव गोस्वामी इस फिल्म में माधवी के अपोज़िट थे। ये एक कंट्रोवर्सियल फिल्म थी। इस पर उस वक्त काफी विवाद हुआ था। कई हिंदू संगठनों ने इस फिल्म का घोर विरोध किया था। इस फिल्म में माधवी ने बिकिनी पहनी थी।
कहा जाता है कि इसी फिल्म की वजह से माधवी का करियर कभी भी श्रीदेवी और जया प्रदा जैसी ऊंचाईयों तक नहीं पहुंच सका। लोगों ने इस फिल्म को बी-ग्रेड कैटेगरी में रखा। इसके बाद आई माधवी की कई हिंदी फिल्में बैक टू बैक फ्लॉप हुई। और माधवी को अहसास हो गया कि अब उनका करियर खात्मे की तरफ बढ़ चला है।
धीरे-धीरे माधवी ने खुद ही अपने कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए। वो मन ही मन बेचैन भी रहने लगी थी। मानसिक बेचैनी के उस फेज़ में एक दफा फिर से माधवी का सहारा बने रजनीकांत। रजनीकांत ने माधवी को स्वामी रामा के बारे में बताया। रजनीकांत खुद भी स्वामी रामा को अपना गुरू मानते थे।
स्वामी रामा अपने वक्त के बहुत बड़े योग और अध्यात्म गुरू थे। देश-विदेश में उनके कई योगाश्रम थे। माधवी ने स्वामी रामा से मिलने का फैसला किया। और फिर एक दिन स्वामी रामा से मिलने माधवी अमेरिका के उनके आश्रम पहुंची। स्वामी रामा ने माधवी से बात की और उन्हें शादी करने की सलाह दी। स्वामी रामा ने माधवी को अपने शिष्य राल्फ शर्मा से मिलाया।
राल्फ शर्मा एक फार्मास्यूटिकल कंपनी के मालिक हैं। वो अमेरिका में ही सेटल्ड थे। बहुत अच्छा बिजनेस था उनका। आज भी है। स्वामी रामा ने माधवी और राल्फ शर्मा को शादी करने की सलाह दी। आखिरकार स्वामी रामा की बात मानते हुए माधवी और राल्फ शर्मा ने 14 फरवरी 1996 को शादी कर ली।
इस तरह माधवी ने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी और पति संग हमेशा के लिए अमेरिका में ही बस गई। अब माधवी, माधवी शर्मा कहलाती हैं। उनकी तीन बेटियां भी हैं। और परिवार संग माधवी अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य में रहती हैं। माधवी बिजनेस में अपने पति राल्फ शर्मा का हाथ बंटाती हैं। हालांकि वो अब भी एक्टिंग और अपने फैंस को मिस करती हैं।
इंटरनेट पर माधवी शर्मा के बारे में एक बात और कही जाती है। स्वामी रामा ने माधवी से कहा था कि राल्फ से शादी करने के बाद तीस सालों तक तुम भारत नहीं लौट सकोगी। स्वामी रामा की बात वाकई में सच साबित हुई। माधवी आज तक भारत लौटकर नहीं आई। प्लान उन्होंने कई दफा बनाया।
लेकिन हर दफा किसी ना किसी वजह से उनका भारत आना कैंसल हो गया। अब ये बात सच है कि नहीं, हम कुछ नहीं कह सकते। यानि हम इसे नकार भी नहीं सकते और आंख बंद करके इसे सही भी नहीं मान सकते। क्योंकि हमें नहीं पता कि ये सच है कि गलत।
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