Satyen Kappu | Bollywood का वो जाना-पहचाना चेहरा जिनकी हस्ती से लोग ज़्यादा वाकिफ़ नहीं हैं | Biography
सत्येन कप्पू बहुत छोटे थे जब मां-बाप का साया उनके सिर से उठ गया था। रिश्तेदारों ने उन्हें व उनके बड़े भाई को एक गुरूकुल में भेज दिया। और गुरूकुल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सत्येन कप्पू जी ने कुछ बच्चों को महाभारत पर आधारित नाटक करते देखा था।
सत्येन कप्पू जी को वो नाटक बहुत पसंद आया। चाहते तो उस वक्त ये भी थे कि इन्हें भी नाटक में काम करने का मौका मिले। मगर गुरूकुल में स्टेज पर आकर एक्टिगं करने का मौका इन्हें नहीं मिला।

Biography of Legendary Bollywood Actor Satyen Kappu - Photo: Social Media
गुरूकुल की शिक्षा पूरी करके जब सत्येन कप्पू आगे की पढ़ाई करने अपने रिश्तेदारों के पास पानीपत रहने आए तो वहां ये एक रामलीला कमेटी से जुड़ गए। और आखिरकार रामलीला में सत्येन कप्पू को सीता जी का किरदार निभाने का मौका मिला। वो कमेटी जन्माष्टमी पर कृष्णलीला का मंचन किया करती थी। कृष्णलीला में सत्येन कप्पू राधा बनते थे।
पानीपत में कुछ सालों तक सत्येन कप्पू जी ने पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे ही रामलीला व कृष्णलीला में अभिनय किया। फ़िर इन्हें अपने बड़े भाई के पास बंबई जाने का मौका मिला।
बंबई ही वो पहली जगह थी जहां सत्येन जी ने कोई प्रोफेशनल नाटक देखा था। और जो नाटक कप्पू साहब ने उस दिन देखा था उसमें पृथ्वीराज कपूर ने अभिनय किया था। सत्येन कप्पू तो बड़े प्रभावित हुए पृथ्वीराज कपूर के अभिनय से।
उन्होंने पृथ्वीराज कपूर के और भी कई नाटक देखे। इत्तेफ़ाक से किसी ने इन्हें बताया कि बंबई में इप्टा नाम की एक संस्था है। उस संस्था का मेंबर बनने के बाद किसी को भी एक्टिंग करने का मौका मिल सकता है।
इस तरह साल 1953 में सत्येन कप्पू जी इप्टा के सदस्य बने और इन्होंने इप्टा संग रहते हुए थिएटर व नाटकों के बारे में कई जानकारियां हासिल की। इप्टा ने इनके दिमाग के पर्दे खोल दिए।
इप्टा से जुड़े तो कुछ समय बाद सत्येन जी को भी स्टेज पर अभिनय करने के मौके मिलने लगे। और देखते ही देखते ये इप्टा के अहम कलाकार हो गए। इनकी एक्टिंग के चर्चे होने लगे।
फ़िर एक दिन इप्टा का एक नाटक देखने आए महान फ़िल्मकार बिमल रॉय, जो उस वक्त इप्टा के प्रेज़ीडेंट भी थे। इत्तेफ़ाक से उस नाटक में सत्येन कप्पू जी भी अभिनय कर रहे थे। इनकी एक्टिंग बिमल दा को भा गई।
बिमल रॉय ने सत्येन कप्पू को अपनी अपकमिंग फ़िल्म नौकरी में एक छोटा सा रोल निभाने का मौका दिया। यूं इस तरह फ़िल्मी दुनिया के दरवाज़े सत्येन कप्पू के लिए खुल गए। हालांकि ये यूं ही फ़िल्मों की तरफ़ नहीं चले गए थे।
थिएटर से सत्येन जी को इतना ज़्यादा लगाव हो गया था कि पहली फ़िल्म में काम करने के बाद ये वापस थिएटर की दुनिया में लौट आए थे। इन्हें कुछ फ़िल्मों में काम करने के ऑफ़र मिले तो इन्होंने उन ऑफर्स को स्वीकार ही नहीं किया।
पर चूंकि थिएटर में पैसा नहीं था, और सत्येन कप्पू अब तक शादीशुदा हो चुके थे तो घर चलाने के लिए उन्हें पैसा कमाना ही था। और पैसा था फ़िल्मों में।
तो आखिरकार सत्येन कप्पू ने फ़िल्मों में रेगुलर एक्टिंग करनी शुरू कर दी। इनकी दूसरी फ़िल्म थी बिमल रॉय की ही काबुलीवाला। और फ़िर कई फ़िल्मों में कप्पू साहब ने अभिनय किया।
हेमा मालिनी जी की हिंदी डेब्यू फ़िल्म "सपनों का सौदागर" में भी सत्येन कप्पू थे। और धीरे-धीरे सत्येन कप्पू जी फ़िल्मों का जाना-पहचाना चेहरा बन गए। अपने करियर में सत्येन कप्पू जी ने अनेकों फ़िल्मों में काम किया।
साल 2006 तक सत्येन कप्पू फ़िल्मों में सक्रिय रहे थे। "सरहद के पार" फ़िल्म, जो 2006 में ही आई थी, वो इनकी आखिरी फ़िल्म थी। कुछ टीवी शोज़ में भी कप्पू जी ने काम किया था।
सत्येन कप्पू जी की पत्नी का नाम था कैलाशवती। उनसे सत्येन जी की अरेंज मैरिज हुई थी। सत्येन जी की चार बेटियां थी। इनकी बेटियों के नाम हैं उमा, विनिता, दीप्ति और तृप्ति।
सत्येन जी की बेटी तृप्ति एक लेखिका हैं। तृप्ति जी टीवी शोज़ के लिए डायलॉग्स व स्क्रीनप्ले लिखती हैं। इससे अधिक जानकारियां सत्येन कप्पू जी के परिवार के बारे में उपलब्ध नहीं हैं।
27 अक्टूबर 2007 को सत्येन कप्पू जी का निधन हो गया था। जबकी उनका जन्म हुआ था 06 फ़रवरी 1931 को। हालांकि इंटरनेट पर कप्पू जी के जन्मदिन को लेकर कई बातें कही जाती हैं। कुछ लोग दावा करते हैं कि कप्पू जी का जन्म 13 अप्रैल को हुआ था।
कुछ लोग कहते हैं कि 14 जनवरी को कप्पू जन्मे थे। कोई इनके जन्म की तारीख 7 फ़रवरी बताता है। और कोई कहता है कि 1 जनवरी को सत्येन कप्पू जी पैदा हुए थे। मगर स्वर्गीय तबस्सुम गोविल जी ने अपने एक यूट्यूब वीडियो में बताया था कि सत्येन कप्पू जी का जन्म छह जनवरी को हुआ था।
चूंकि तबस्सुम जी फ़िल्म इंडस्ट्री की हस्ती थी तो उनकी बात सबसे अधिक भरोसेंद है। इंटरनेट पर ये भी कहा जाता है कि सत्येन कप्पू पानीपत में जन्मे थे। मगर ये भी एक गलत जानकारी है। कप्पू साहब के माता-पिता पानीपत के ज़रूर थे। मगर उनका जन्म मुंबई में हुआ था।
कप्पू जी के पिता बुद्धसेन शर्मा मुंबई में बिजनेस करते थे। उनका एक आईसक्रीम ब्रांड था जिसका नाम था डिलाइट कुल्फ़ी। बुद्धसेन शर्मा जी अपनी पत्नी गंगा देवी व अपने दोनों बेटों संग मुंबई में ही रहते थे। सत्येन जी का पूरा नाम सतेंद्र शर्मा था। हालांकि विकीपिडिया पर इनका नाम सत्येंद्र कपूर बताया जाता है। जो है नहीं।
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